Independence day 2026: भारत की आजादी का इतिहास जितना संघर्षों, आंदोलनों और शहादतों से भरा है, उतना ही दिलचस्प इसकी तारीख का तय होना भी है। ब्रिटिश हुकूमत ने करीब 200 सालों तक भारत पर शासन किया था। 1765 में ईस्ट इंडिया कंपनी से शुरू हुआ यह शासन 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद सीधे ब्रिटिश क्राउन के हाथों में चला गया था। इसके बाद स्वतंत्रता की मांग लगातार मजबूत होती गई। लंबे अहिंसक और हिंसक आंदोलनों के बाद आखिरकार अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। लेकिन सवाल यह उठता है कि भारत की आजादी के लिए आखिर 15 अगस्त की तारीख ही क्यों चुनी गई? क्या इसके पीछे कोई खास ऐतिहासिक वजह थी या यह सिर्फ एक इत्तेफाक था? आइए समझते हैं।
पहले 26 जनवरी को माना जाता था 'स्वतंत्रता दिवस'
हर साल 15 अगस्त को पूरा देश स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाता है। पूरा देश देशभक्ति के रंग में डूबा नजर आता है। लेकिन यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि आजादी मिलने से पहले तक भारत में 26 जनवरी को 'स्वतंत्रता दिवस' के रूप में मनाया जाता था। वर्ष 1929 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में 'पूर्ण स्वराज' (पूर्ण स्वतंत्रता) का ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके बाद, 26 जनवरी 1930 को देश का पहला सांकेतिक स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। तब से लेकर 1947 तक हर साल 26 जनवरी को ही स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता रहा।जब 15 अगस्त 1947 को वास्तविक आजादी मिली, तो यह तारीख बदल गई। लेकिन 26 जनवरी की ऐतिहासिक अहमियत को खत्म नहीं होने दिया गया। 1950 में इसी दिन भारत का संविधान लागू हुआ और देश गणराज्य बना। इस तरह 26 जनवरी गणतंत्र दिवस और 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस बन गया।
1948 में मिलनी थी आजादी, फिर क्यों बदली तारीख?
ब्रिटिश संसद ने भारत के आखिरी वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन को जिम्मेदारी दी थी कि वे 30 जून 1948 तक भारतीय नेताओं को सत्ता का हस्तांतरण (Transfer of Power) कर दें। लेकिन स्थितियां तेजी से बदल रही थीं। स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता सी. राजगोपालचारी (सी. राजाजी) के अनुसार, "यदि माउंटबेटन जून 1948 तक इंतजार करते तो हस्तांतरित करने के लिए कोई सत्ता बचती ही नहीं।" देश भर में सांप्रदायिक तनाव और राजनीतिक उथल-पुथल इतनी ज्यादा बढ़ चुकी थी कि माउंटबेटन ने तय समय से लगभग 10 महीने पहले यानी अगस्त 1947 में ही सत्ता सौंपने का फैसला किया।
माउंटबेटन का मानना था कि जल्दी आजादी मिलने से खून-खराबा रुकेगा। हालांकि, बाद में उन्होंने खुद स्वीकार किया कि "जहां भी औपनिवेशिक शासन समाप्त हुआ है, वहां रक्तपात हुआ ही है। यह वह कीमत है जो चुकानी पड़ती है।"
15 अगस्त चुनने के पीछे की असली वजह
माउंटबेटन की सलाह पर तैयार किए गए 'भारतीय स्वतंत्रता विधेयक' (Indian Independence Bill) को ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स में 4 जुलाई 1947 को पेश किया गया। इसे दो हफ्तों के भीतर ही मंजूरी दे दी गई। जब माउंटबेटन से पूछा गया कि उन्होंने 15 अगस्त की तारीख ही क्यों चुनी, तो उन्होंने कहा था, "यह तारीख मेरे दिमाग में अचानक एक सवाल के जवाब में आई थी। मैं यह दिखाना चाहता था कि पूरी घटना की कमान मेरे हाथ में है। जब मुझसे पूछा गया कि क्या हमने कोई तारीख तय की है, तो मुझे लगा कि यह जल्द होनी चाहिए। मैंने अगस्त या सितंबर का सोचा था और फिर मैंने सीधे 15 अगस्त को चुना। क्यों? क्योंकि यह द्वितीय विश्व युद्ध में जापान के आत्मसमर्पण की दूसरी वर्षगांठ (Second Anniversary of Japan's Surrender) थी।"
जापान के आत्मसमर्पण से जुड़ी थी 15 अगस्त की कहानी
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 15 अगस्त 1945 को ही जापानी सेना ने मित्र राष्ट्रों के सामने आत्मसमर्पण किया था। माउंटबेटन उस समय दक्षिण-पूर्व एशिया में मित्र राष्ट्रों के कमांडर थे। यह घटना माउंटबेटन के सैन्य करियर की बड़ी उपलब्धियों में से एक थी। वे 15 अगस्त को अपने सैन्य जीवन का सबसे शुभ और लकी दिन मानते थे, इसीलिए उन्होंने भारत की आजादी के लिए भी वही तारीख चुन ली।
भारत और पाकिस्तान का विभाजन
जब 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों ने भारत को स्वतंत्रता सौंपी, तो यह एक अखंड राष्ट्र के रूप में नहीं, बल्कि दो अलग-अलग डोमिनियन—भारत और पाकिस्तान के रूप में मिली। जहां पाकिस्तान अपना स्वतंत्रता दिवस 14 अगस्त को मनाता है, वहीं भारत 15 अगस्त को अपनी आजादी का जश्न मनाता है।
फिर पाकिस्तान 14 अगस्त को क्यों मनाता है स्वतंत्रता दिवस?
कानूनी रूप से देखा जाए तो भारत और पाकिस्तान दोनों को एक ही दिन 15 अगस्त को आजादी मिली थी। अंग्रेजों के 'इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट' (Indian Independence Act 1947) में साफ लिखा था कि 15 अगस्त 1947 को दो स्वतंत्र डोमिनियन—भारत और पाकिस्तान अस्तित्व में आएंगे। फिर 14 अगस्त पाकिस्तान की आजादी की तारीख आखिर कैसे बन गई। इसकी वजह सत्ता हस्तांतरण समारोह की टाइमिंग से जुड़ी मानी जाती है। माउंटबेटन को कराची में जाकर मोहम्मद अली जिन्ना को सत्ता सौंपनी थी और इसके बाद 15 अगस्त की मध्यरात्रि को दिल्ली में भारत के सत्ता हस्तांतरण समारोह में शामिल होना था। इसी वजह से कराची का समारोह 14 अगस्त 1947 को हुआ।
तो फिर तारीख क्यों बदली?
दिलचस्प तथ्य यह भी है कि पाकिस्तान के शुरुआती आधिकारिक रिकॉर्ड और उसके पहले स्वतंत्रता दिवस से जुड़े दस्तावेजों में 15 अगस्त 1947 का जिक्र मिलता है। जुलाई 1948 में पाकिस्तान द्वारा जारी किए गए पहले आधिकारिक डाक टिकटों पर भी देश की आजादी की तारीख 15 अगस्त 1947 ही दर्ज थी। लेकिन बाद में पाकिस्तान ने 14 अगस्त को देश के स्वतंत्रता दिवस के रूप में अपनाया। इसके पीछे 14 अगस्त 1947 के रमजान की 27वीं तारीख होने की बात भी बताई जाती है, हालांकि तारीख बदलने की वजह को लेकर अलग-अलग ऐतिहासिक व्याख्याएं मिलती हैं।
लाल किले पर तिरंगा और एक नई शुरुआत
15 अगस्त 1947 को जवाहरलाल नेहरू ने भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। उन्होंने दिल्ली में लाल किले के लाहौरी गेट के ऊपर स्वतंत्र भारत का राष्ट्रीय ध्वज फहराया। तब से यह एक ऐतिहासिक परंपरा बन गई है। हर साल देश के प्रधानमंत्री लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हैं और देश के वीर शहीदों की कुर्बानियों को याद करते हैं।