कर्नाटक में सीएम पद को लेकर मची सियासी रार के बीच सीएम सिद्दारमैया ने केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी पर करारा तंज कसा है। उन्होंने कुमारस्वामी को मनुवादी करार दिया। मुख्यमंत्री का यह कटाक्ष कुमारस्वामी द्वारा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हाल ही में लिखे गए पत्र के जवाब में आया है, जिसमें उन्होंने छात्रों के पाठ्यक्रम में भगवद् गीता को शामिल करने का अनुरोध किया था। इतना ही नहीं इस दौरान सिद्दारमैया ने यह भी बताया कि संविधान निर्माता डॉ बीआर आंबेडकर ने अपने जीवन के आखिरी समय में हिंदू धर्म को छोड़ बौद्ध धर्म क्यों अपना लिया था।
सीएम सिद्दारमैया
'मनुवादी' हैं कुमारस्वामी
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने शनिवार को केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी पर निशाना साधा। सिद्दारमैया ने बीआर अंबेडकर की 69वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद संवाददाताओं से कहा कि कुमारस्वामी चुनावों के लिए भाजपा से हाथ मिलाने के बाद मनुवादी बन गए हैं। दरअसल, उनका यह बयान तब आया है जब हाल ही में एचडी कुमारस्वामी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को एक पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने प्रधान से छात्रों के पाठ्यक्रम में भगवद् गीता को शामिल करने का अनुरोध किया था। जिसके बाद सिद्दारमैया ने धर्म को लेकर उनपर हमला बोला है।
हिंदू धर्म को छोड़ बौद्ध क्यों बन गए थे बाबा साहेब?
आगे बोलते हुए सिद्दारमैया ने बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के संविधान में योगदान और सामाजिक न्याय के लिए उनके अथक संघर्ष पर भी बात की। बाबा साहेब बा जन्म हिंदू धर्म में हुआ था, बावजूद इसके वे जीवनभर हिंदू नहीं रहे। आंबेडकर ने अपने जीवन के अंतिम समय में हिंदू धर्म छोड़ दिया और बौद्ध धर्म अपना लिया था। दरअसल, सामाजिक न्याय के लिए अपनी लड़ाई में कई प्रयासों के बावजूद वे हिंदू धर्म में सुधार नहीं ला सके, इसलिए उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया। वे हिंदू धर्म में सामाजिक और जाति व्यवस्था से तंग आ गए थे।
सीएम पद को लेकर गर्म है कर्नाटक की सियासत
गौरतलब है कि इन दिनों सीएम सिद्दारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच राज्य के नेतृत्व के लिए अदावत चल रही है। काफी कोशिशों के बावजूद दोनों के बीच जमी बर्फ पिघल नहीं पा रही है। कांग्रेस हाई कमान ने दोनों को आपसी तनाव को कम करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद दोनों के बीच ब्रेकफास्ट डिप्लोमेसी भी हुई, लेकिन सियासी तपिश बरकरार है, भले ही दोनों नेता मीडिया के सामने सब कुछ सामान्य होने की बात कहते हों, लेकिन गाहे-बगाहे ऐसे बयान या सोशल मीडिया पोस्ट आ ही जाती हैं, जो संकेत देती हैं कि कर्नाटक की सियासत में फिलहाल सबकुछ ठीक नहीं है।
