तेलंगाना में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ चल रही मुहिम के बीच बड़ी सफलता हाथ लगी है। प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) के वरिष्ठ कमांडर और रणनीतिकार थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी ने तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। देवजी पर एक करोड़ रुपये का ईनाम था।
टॉप माओवादी देवजी ने तेलंगाना पुलिस के सामने किया 'सरेंडर'
तेलंगाना के जगतियाल जिले के निवासी
62 साल के देवजी मूल रूप से तेलंगाना के जगतियाल जिले के निवासी हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, उन्हें संगठन का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता था और वे केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) के प्रभारी के तौर पर काम कर रहे थे। माना जाता है कि मई 2025 में सीपीआई (माओवादी) के महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू की मौत के बाद देवजी ने नेतृत्व की भूमिका संभाली थी।
एक करोड़ का इनाम
देवजी पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। वे पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) के गठन में भी अहम भूमिका निभा चुके थे और संगठन की केंद्रीय समिति तथा पोलित ब्यूरो के सदस्य रहे। वे छत्तीसगढ़ के माड़ क्षेत्र से अपने कामों को अंजाम देते थे। सूत्रों के अनुसार, 1982 में जगतियाल जिले के कोरुटला में इंटरमीडिएट की पढ़ाई के दौरान वे रैडिकल स्टूडेंट यूनियन (RSU) से जुड़े। बाद में 1983 में सीपीआई-एमएल (पीपुल्स वार ग्रुप) में शामिल होकर भूमिगत हो गए। समय के साथ वे संगठन में ऊंचे पदों पर पहुंचते गए और 2001 में केंद्रीय समिति के सदस्य बने। 2016 में उन्हें केंद्रीय सैन्य आयोग की जिम्मेदारी सौंपी गई।
आंतरिक मतभेदों के बीच समर्पण
हाल के महीनों में संगठन के भीतर सशस्त्र संघर्ष जारी रखने और अस्थायी युद्धविराम के मुद्दे पर मतभेद सामने आए थे। अक्टूबर 2025 में महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में वरिष्ठ नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ सोनू ने 60 अन्य कैडरों के साथ आत्मसमर्पण कर सशस्त्र संघर्ष को अस्थायी रूप से त्यागने की बात कही थी। बताया जाता है कि देवजी और कुछ अन्य नेता उस समय संघर्ष जारी रखने के पक्ष में थे।
सुरक्षा अभियान का दबाव
सुरक्षा बलों ने 17 फरवरी से छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर ‘केजीएच-2’ नामक व्यापक अभियान शुरू किया था। अधिकारियों के मुताबिक, देवजी समेत कुछ शीर्ष केंद्रीय समिति सदस्य सुरक्षा बलों की तलाश सूची में थे। केंद्र सरकार ने मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। पुलिस के अनुसार, पिछले दो वर्षों में 588 माओवादी नेता और कैडर मुख्यधारा में लौट चुके हैं। देवजी और अन्य वरिष्ठ नेताओं का आत्मसमर्पण संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
