दिल्ली का बॉस कौन: SC के फैसले को केंद्र ने अध्यादेश के जरिए पलटा, जानें- आगे क्या होगा

  • Authored by: ललित राय
  • Updated May 20, 2023, 02:18 PM IST

Who is the boss of Delhi: केंद्र सरकार ने अध्यादेश के जरिए सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया है जिसमें नौकरशाहों पर दिल्ली सरकार के नियंत्रण को कानूनी माना। अब अध्यादेश के जरिए एक समिति बनेगा जो निर्णय लेगी। उस कमेटी में दिल्ली के सीएम भी हैं, लेकिन आम आदमी पार्टी ऐतराज जता रही है।

Who is the boss of Delhi: नौकरशाह मनमानी करते हैं, दिल्ली सरकार के आदेशों की अनदेखी कर देते हैं, लेफ्टिनेंट गवर्नर के दफ्तर(Lieutenant Governor V K Saxena) से संचालित होते हैं। इस तरह के आरोप ना सिर्फ दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल(Arvind Kejriwal) लगाते रहे हैं बल्कि उनके मंत्रिमंडल और पार्टी का सुर भी एक जैसा रहा है। 2019 में मामला सुप्रीम कोर्ट में गया जिसमें यह फैसला होना था कि दिल्ली का बॉस कौन है, पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने फैसला दिया कि नौकरशाहों के ट्रांसफर और पोस्टिंग पर तो चुनी हुई सरकार का हक है, लिहाजा सुप्रीम कोर्ट ने माना कि दिल्ली का बॉस दिल्ली सरकार है। लेकिन शुक्रवार को केंद्र सरकार ने अध्यादेश के जरिए अदालत के फैसले को पलटा और सिविल सर्विसेज प्राधिकरण बनाकर लेफ्टिनेंट गवर्नर को अधिकार दे दिए। इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने पुनर्विचार याचिका लगाई है। लेकिन यहां हम बात करेंगे कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India)के आदेश के बाद क्या अध्यादेश के जरिए फैसले को पलटा जा सकता है, अगर हां तो इसका असर क्या होगा।

संसद के पास है विधाई शक्ति

संसद के पास विधायी अधिनियम द्वारा न्यायालय के निर्णय को पलटने की शक्ति है, हालांकि कानून केवल सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के विपरीत नहीं हो सकता है, इसे न्यायालय के अंतर्निहित तर्क पर खरा उतरना चाहिए। इसका अर्थ यह है कि फैसले के आधार को हटाकर एक कानून पारित किया जा सकता है। ऐसा कानून पहले से या आगे की किसी तारीख से प्रभावी हो सकता है। कानून को मान्य करने की वैधता का निर्धारण करने के लिए परीक्षण यह है कि दोष को इंगित करने वाला निर्णय पारित नहीं किया गया होता यदि वैधीकरण कानून द्वारा बदली गई स्थिति न्यायालय के समक्ष अपना निर्णय देने के समय मौजूद थी। दूसरे शब्दों में दोष को इस तरह ठीक किया जाना चाहिए था कि दोष को इंगित करने वाले फैसले के आधार हटा दिया जाए।

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