BRICS Summit 2026 का आयोजन इस बार दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को दिल्ली में हो रहा है। इसके लिए सदस्य देशों के नेता पहुंचना शुरू हो गए हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार रात दिल्ली पहुंचे जबकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शुक्रवार सुबह पहुंचेंगे। इन दोनों नेताओं के अलावा ब्रिक्स के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष, पर्यवेक्षक एवं आमंत्रित देशों के शीर्ष नेता एवं प्रतिनिधि भी इस समिट में शिरकत करेंगे। ब्रिक्स के अभी 11 सदस्य देश हैं। समिट का आयोजन दिल्ली के भारत मंडपम में हो रहा है और इस बार समिट की थीम 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता' का निर्माण है।
दिल्ली के भारत मंडपम में ब्रिक्स समिट 2026 का आयोजन। तस्वीर-AI
BRICS के 11 सदस्य देश
- ब्राजील
- रूस
- भारत
- चीन
- दक्षिण अफ्रीका
- मिस्र
- इथियोपिया
- ईरान
- संयुक्त अरब अमीरात
- सऊदी अरब
- इंडोनेशिया
BRICS के साझेदार देश
- बेलारूस
- बॉलीविया
- कजाकिस्तान
- क्यूबा
- मलेशिया
- नाइजीरिया
- थाईलैंड
- युगांडा
- उज्बेकिस्तान
- वियतनाम
- शी जिनपिंग-राष्ट्रपति, चीन
- व्लादिमीर पुतिन-राष्ट्रपति, रूस
- सिरिल रामाफोसा-राष्ट्रपति, दक्षिण अफ्रीका
- मसूद पेजेशकियन-राष्ट्रपति, ईरान
- अब्देल फतह अल-सीसी-राष्ट्रपति, मिस्र
- अबiy अहमद -प्रधानमंत्री, इथियोपिया
- प्रबोवो सुबियांतो - राष्ट्रपति, इंडोनेशिया
- शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान-अबू धाबी के क्राउन प्रिंस, यूएई
- माउरो विएरा -विदेश मंत्री, ब्राजील
ब्रिक्स के पार्टनर देशों के नेता
- अलेक्जेंडर लुकाशेंको-राष्ट्रपति, बेलारूस
- कासिम-जोमार्ट तोकायेव-राष्ट्रपति, कजाकिस्तान
- अनवर इब्राहिम-प्रधानमंत्री, मलेशिया
- अनुतिन चार्नवीराकुल-प्रधानमंत्री, थाईलैंड
- मिगेल दियाज-कानेल-राष्ट्रपति, क्यूबा
- बोला अहमद टिनूबू -राष्ट्रपति, नाइजीरिया
- शौकत मिर्जियोयेव -राष्ट्रपति, उज्बेकिस्तान
- जेसिका अलुपो -उपराष्ट्रपति, युगांडा
एंटोनियो गुटेरेस-संयुक्त राष्ट्र महासचिव
ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों के कई वरिष्ठ कारोबारी नेता भी इस फोरम में शामिल होने की उम्मीद है।
- फ्रांसिस्को गोम्स नेटो -एम्ब्रेयर के अध्यक्ष और सीईओ
- गुस्तावो पिमेंटा-वाले के सीईओ
- फूथी महन्येले-दबेंगा-नासपर्स की सीईओ
- ओलेग बेलोजेरोव-रूसी रेलवे के सीईओ और चेयरमैन
- अलेक्जेंडर वेद्याखिन-स्बरबैंक के प्रथम उपाध्यक्ष
बैठक में प्रतिनिधित्व करने वाली कंपनियां ऊर्जा, बैंकिंग, तकनीक, शिपिंग, विमानन और खनन जैसे विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी हैं।
'ग्लोबल साउथ’ के विकास को प्राथमिकता
विश्व में बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच, भारत शनिवार से शुरू हो रहे दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का उपयोग आर्थिक विकास को गति देने के लिए कर रहा है। साथ ही, भारत 'ग्लोबल साउथ’ के विकास से जुड़ी मुख्य प्राथमिकताओं, विशेष रूप से खाद्य, ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा की वकालत भी कर रहा है। शिखर सम्मेलन की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस बीच, चीन ने राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने भारत आने की पुष्टि कर दी है। सात साल के अंतराल के बाद यह भारत की उनकी पहली यात्रा होगी।
ब्रिक्स बना एक अहम मंच
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और उनके इंडोनेशियाई समकक्ष प्रबोवो सुबियांतो उन प्रमुख नेताओं में शामिल हैं जो राष्ट्रीय राजधानी में होने वाले शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। शीर्ष अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत 'ग्लोबल साउथ’ की मुख्य विकास प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए ब्रिक्स (ब्रिक्स) समूह को एक अहम और पूरक मंच के तौर पर आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार विवादों और भू-राजनीतिक बदलावों से पैदा हो रही आर्थिक चुनौतियों के बीच, 'हम खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा स्थिरता और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी प्रमुख कमजोरियों को दूर करने पर ध्यान दे रहे हैं।’
वैश्विक संघर्षों एवं तनाव के बीच बैठक
'ग्लोबल साउथ’ से तात्पर्य उन देशों से है जिन्हें अक्सर विकासशील, अल्प विकसित या अविकसित के रूप में जाना जाता है। ये मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका में स्थित हैं। नई दिल्ली में यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट (खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी) और (अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड) ट्रंप प्रशासन की व्यापार व शुल्क (टैरिफ) नीतियों के प्रतिकूल प्रभावों का सामना कर रही है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में ब्रिक्स की हिस्सेदारी
ब्रिक्स एक प्रभावशाली समूह के तौर पर उभरा है क्योंकि यह दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाता है, जो वैश्विक आबादी का लगभग 49.5 प्रतिशत, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार का लगभग 26 प्रतिशत हिस्सा हैं। इस समूह की अध्यक्षता के दौरान भारत का ध्यान चार मुख्य स्तंभों पर केंद्रित है: लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता। अधिकारियों ने बताया कि लचीलापन के तहत भारत स्वास्थ्य, कृषि, खाद्य, ऊर्जा, आपदा जोखिम कम करने और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में सामूहिक सहयोग को मज़बूत करने पर ध्यान केंद्रित करता रहा है।
