बेबाक तेवर: जब मुनव्वर राना ने लौटाया था अपना पुरस्कार, योगी सरकार पर भी कही थी ये बात

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 15, 2024, 07:59 AM IST

Munawwar Rana: उर्दू में मुनव्वर राना के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। अपनी गजलों और कविताओं से उन्होंने लोगों के दिलों में जगह बनाई।

Munawwar Rana: मशहूर शायर मुनव्वर राना का रविवार को निधन हो गया। वह 71 वर्ष के थे। मुनव्वर का रविवार देर रात लखनऊ स्थित संजय गांधी परास्नातक आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में निधन हो गया। वह पिछले काफी समय से गले के कैंसर से पीड़ित थे। राना को सोमवार को उनकी वसीयत के मुताबिक लखनऊ में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। बेटी सोमैया ने बताया कि उनके परिवार में उनकी मां, चार बहनें और एक भाई हैं। हिंदुस्तान के सबसे मशहूर शायरों में शुमार किए जाने वाले मुनव्वर राना की नज्म ‘मां’ का उर्दू साहित्य जगत में एक अलग स्थान है।

Munawwar Rana

मुनव्वर राना

उर्दू में मुनव्वर राना का योगदान

उर्दू में मुनव्वर राना के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। अपनी गजलों और कविताओं से उन्होंने लोगों के दिलों में जगह बनाई। अपनी लेखनी में वह अक्सर हिंदी और अवधी शब्दों का वह प्रयोग किया करते थे और इसे खूब पसंद भी किया गया। उनकी सबसे प्रसिद्ध कविताओं में 'मां' शामिल है, जिसे उनकी सबसे बेहतरीन कृति बताया जाता है। इस कविता में उन्होंने मां की खासियतों को बताया है।

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