Delhi Pragati Maidan tunnel: दिल्ली के प्रगति मैदान सुरंग में गंभीर गड़बड़िया सामने आने लगी हैं। इसका उद्घाटन 19 जून 2022 को हुआ था, लेकिन डेढ़ साल में ही इसकी तकनीकी खामिया सामने आने लगी हैं। अब इसे लेकर दिल्ली के लोक निर्माण विभाग ने प्रगति मैदान सुरंग के लिए जिम्मेदार निर्माण कंपनी लार्सन एंड टुब्रो और उसके अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। इसमें कहा गया है कि सुरंग में गंभीर तकनीकी और डिजाइन खामियां थीं। 3 फरवरी को जारी किए गए PWD के नोटिस में कहा गया है कि निर्माण में अहम बदलाव से अंडरपास और सुरंगों पर अपूरणीय और अभूतपूर्व असर पड़ने की संभावना है, जिनका उपयोग जनता द्वारा वर्षों तक किया जाना है।
दिल्ली प्रगति मैदान सुरंग
दिल्ली सरकार ने कंपनी से 500 करोड़ रुपये जमा करने को कहा
वहीं, दिल्ली सरकार ने कंपनी से 500 करोड़ रुपये जमा करने और सुरंग पर मरम्मत कार्य शुरू करने की मांग की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 जून, 2022 को प्रगति मैदान इंटीग्रेटेड ट्रांजिट कॉरिडोर परियोजना के हिस्से के रूप में 1.3 किलोमीटर लंबी सुरंग और पांच अंडरपास का उद्घाटन किया था। पिछले साल दिल्ली बाढ़ के दौरान जलभराव के कारण सुरंग को कई बार बंद किया गया था। नोटिस में आरोप लगाया गया कि समय बीतने के साथ परियोजना में गंभीर खामियां सामने आई हैं जो न केवल तकनीकी किस्म की थीं बल्कि डिजाइन संबंधी खामियां भी इसमें थीं। इसमें कहा गया है कि सबसे भयावह और चिंताजनक मुद्दा अंडरपास में विभिन्न स्थानों पर पानी का जमाव था। इसने आवाजाही को बुरी तरह प्रभावित किया।
प्रगति मैदान टनल के साथ क्या गड़बड़ी हुई?
777 करोड़ रुपये लागात वाली प्रगति मैदान सुरंग परियोजना में क्या गड़बड़ी हुई? यहां इतने सारे रिसाव क्यों हैं? शहरी नियोजन एक्सपर्ट अर्चित प्रताप सिंह बताते हैं कि एक लचीली भूमिगत सुरंग बनाने के लिए मिट्टी और चट्टान की स्थिति को समझने के लिए गहन भू-तकनीकी परीक्षण की आवश्यकता होती है।
इंजीनियर भूवैज्ञानिक निष्कर्षों के आधार पर रॉक बोल्ट और टनल लाइनिंग जैसी विधियों के मुताबिक ही प्रणालियों का चयन करते हैं। उन्होंने कहा, प्रगति मैदान सुरंग में रिसाव ने बता दिया है कि निर्माण के दौरान उचित वॉटरप्रूफिंग उपायों की कमी को सामने लाया है। इसी कारण पानी का रिसाव होता है। 1.3 किमी जल निकासी सुरंग में पानी जमा होने की घटनाएं और अहम जगहों पर नालियां की गैर-मौजूदगी ने कार्यान्वयन में संभावित खामियों को सामने ला दिया है। दो वर्षों के भीतर सुरंग में दिखाई देने वाली दरारें खास चिंता का सबब हैं।
रिकॉर्ड समय में निर्माण
इस अंडरपास का निर्माण रिकॉर्ड समय में किया गया था। विशेषज्ञ अब मानते हैं कि किसी भी ऐसे प्रोजेक्ट में मल्टी-टीम सुरक्षा ऑडिट की आवश्यकता होती है। लगातार पानी का रिसाव कंक्रीट और टीएमटी बार से बनी किसी भी संरचना के लिए विनाशकारी खतरा पैदा कर सकता है, चाहे वह ऊंची इमारत हो, फ्लाईओवर हो या अंडरपास हो। लगातार जलभराव के कारण मानसून के दौरान बंद रहने के बावजूद अंडरपास में रिसाव जारी रहने से मामला और गंभीर हो गया है। नोटिस में इस बात का खास जिक्र है कि परियोजना का पूरा डिजाइन और कार्यान्वयन एलएंडटी के नियंत्रण में था और इसमें किसी सरकारी एजेंसी की कोई भूमिका नहीं थी।
