क्या है राम वन गमन पथ,जिस पर भगवान राम के दौर की हैं निशानियां

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  • Updated Oct 5, 2022, 04:07 PM IST

Sri Ram Van Gaman Path: राम वन गमन पथ को उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और लेकर छत्तीसगढ़ में विकसित किया जा रहा है। अयोध्या से श्रीलंका तक की 14 साल की यात्रा में करीब 240 से ज्यादा स्थान है, जहां भगवान राम , माता सीता और लक्ष्मण रुके, या वह किसी न किसी घटना से जुड़े रहे।

KEY HIGHLIGHTS
  • अयोध्या से वन गमन को जब भगवान श्रीराम चले तो वह उत्तर प्रदेश में करीब 37 स्थलों से गुजरे थे।
  • छत्तीसगढ़ को भगवान श्री राम का ननिहाल माना जाता है। उनकी माता कौशल्या का मायका छत्तीसगढ़ में है।
  • 14 साल के वनवास के दौरान भगवान श्रीराम ने चित्रकूट में काफी समय बिताया था।

Sri Ram Van Gaman Path:भगवान को जब वनवास मिला था, तो वह अयोध्या ( Ayodhya) से चलते हुए जिन रास्तों से गुजरे, उस वन गमन को अब राम वन गमन पथ (Ram Van Gaman Path) बनाया जा रहा है। राम वन गमन पथ को उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और लेकर छत्तीसगढ़ में विकसित किया जा रहा है। दशहरे के मौके पर आज हम आपको उस राम वन गमन पथ के बारे में बता रहे हैं। जहां पर राम वन गमन पथ का निर्माण किया जा रहा है। अयोध्या से श्रीलंका तक की 14 साल की यात्रा में ऐसे करीब 248 स्थान है, जहां भगवान राम (Lord Ram), माता सीता और लक्ष्मण ने या तो विश्राम किया और किसी न किसी घटना से वह जुड़े।

ram van gaman path

राम वन गमन पथ

यूपी में निषाद राज का राज्य से लेकर भरत मुनि का आश्रम

अयोध्या से वन गमन को जब भगवान श्रीराम चले तो वह उत्तर प्रदेश में करीब 37 स्थलों से गुजरे थे। अब इन्ही स्थलों को विकसित किया जा रहा है। जिसमें 210 किलोमीटर का राम वन गमन पथ का निर्माण किया जाना है। इस पर करीब 4400 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसमें तमसा नदी का क्षेत्र, शृगवेरपुर (सिंगरौर) जहां निषादराज का राज्य था। इसके अलावा प्रयागराज (Prayagraj), चित्रकूट (Chitrakoot) सहित दूसरे स्थलों को विकसित किया जा रहा है। प्रयागराज में वाल्मीकि आश्रम, मांडव्य आश्रम, भरतकूप आदि भगवान राम से जुड़ी निशानियां हैं।

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