Waqf Panel Accepts Three Major Changes: वक्फ (संशोधन) विधेयक बनी संसदीय समिति ने सोमवार को हुई एक बैठक में भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों द्वारा प्रस्तावित सभी संशोधनों को स्वीकार कर लिया और विपक्षी सदस्यों के संशोधनों को खारिज कर दिया। इसे लेकर विपक्ष ने सरकार और समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल को भी निशाने पर लिया। सूत्रों के अनुसार, वक्फ संशोधन बिल में जेपीसी में तीन बड़े बदलाव मंजूर किए गए हैं।
वक्फ बिल पर जेपीसी
1. कोई संपत्ति वक्फ है या नहीं, इसके निर्धारण का अधिकार संशोधन बिल में जिला कलेक्टर को दिया गया था। लेकिन अब जेपीसी कमिटी ने इसमें बदलाव करने की अनुशंसा की है। अब कलेक्टर की बजाय राज्य सरकार की ओर से नामित जिला अधिकारी से बड़ा अधिकारी उसका फैसला करेगा।
2. संसद में पेश हुए संशोधित बिल में प्रावधान है कि राज्य वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद में दो ग़ैर मुस्लिम सदस्य होंगे। अब बदलाव करके पदेन सदस्यों को इससे अलग रखा गया है। इसका मतलब ये है कि नामित सदस्यों में से दो सदस्यों का गैर मुस्लिम होना अनिवार्य होगा ( इससे फर्क नहीं पड़ेगा कि पदेन सदस्य गैर मुस्लिम है या नहीं )।
3. नया रानून रिट्रोस्पेक्टिव लागू नहीं होगा। यानी बिल को संसद से मंजूरी मिलने के बाद से ही लागू होगा। लेकिन जेपीसी ने फैसला किया है कि वक्फ संपत्ति का पंजीकृत होना अनिवार्य होगा। यानी पहले की जो भी वक्फ संपत्ति है, उसका रजिस्टर होना जरूरी होगा। अन्यथा उन सभी संपत्तियों का फैसला बिल में तय मानकों के अनुसार होगा।
कलेक्टर रैंक से ऊपर के अधिकारी को अहम जिम्मेदारी
सूत्रों ने बताया कि भाजपा और उसके सहयोगियों द्वारा समर्थित और समिति द्वारा पारित किए गए अन्य संशोधनों में सरकारी संपत्ति के विवाद का सर्वेक्षण संबंधित जिला कलेक्टर से कराए जाने के अधिकार को समाप्त करने का निर्णय शामिल है। इस संशोधन के समर्थन में भाजपा और उसके सहयोगियों के 16 मत पड़े जबकि विरोध में विपक्ष के 10 सदस्य रहे। भाजपा सांसद बृजलाल द्वारा प्रस्तावित और स्वीकृत किए गए संशोधन में कहा गया है कि राज्य सरकार कानून के मुताबिक जांच करने के लिए कलेक्टर रैंक से ऊपर के किसी अधिकारी को अधिसूचना के जरिए नामित कर सकती है।
द्रमुक के ए राजा बोले- जाएंगे सुप्रीम कोर्ट
द्रमुक के ए राजा ने आरोप लगाया कि समिति की कार्यवाही को मजाक बना दिया गया है और रिपोर्ट इस समय तक तैयार की जा चुकी है। उन्होंने कहा, अगर इसे संसद की मंजूरी मिल जाती है तो द्रमुक और खुद मेरी तरफ से, सुप्रीम कोर्ट से नए कानून को निरस्त कराने के लिए अनुरोध किया जाएगा। पाल ने हालांकि आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि समिति ने सभी संशोधनों पर लोकतांत्रिक तरीके से विचार किया। उन्होंने कहा कि बहुमत का दृष्टिकोण भारी पड़ा। उन्होंने कहा कि स्वीकृत संशोधन प्रस्तावित कानून को बेहतर और अधिक प्रभावी बनाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार समिति द्वारा किए गए बदलावों को स्वीकार करने के लिए बाध्य है।
कल्याण बनर्जी भी भड़के
पाल पर निशाना साधते हुए तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने दावा किया कि सब कुछ पहले से तय था। हमें कुछ भी कहने की अनुमति नहीं थी। किसी भी नियम और प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। हम संशोधनों पर खंडवार चर्चा करना चाहते थे लेकिन हमें इसकी अनुमति नहीं दी गई। अध्यक्ष ने संशोधन पेश किए और फिर हमारी बातों को सुने बिना उन्हें घोषित कर दिया। यह लोकतंत्र के लिए बुरा दिन है।
