Waqf Board Supreme Court Hearing: किसी को भी ‘वक्फ बाई यूजर' के तहत भी सरकारी जमीन पर दावे का अधिकार नहीं- केंद्र

Waqf Board Supreme Court Hearing: केंद्र ने दलील थी कि संसद द्वारा पारित कानून पर आमतौर पर रोक नहीं लगाई जा सकती। इसका जवाब देते हुए सिंघवी ने कहा कि कृषि कानूनों पर शीर्ष अदालत ने रोक लगा दी थी। केंद्र ने दलील दी कि 2013 के संशोधन के बाद वक्फ संपत्तियों में ‘‘1600 प्रतिशत की वृद्धि’’ हुई है। इसपर सिंघवी ने कहा कि यह वृद्धि डिजिटलीकरण और सूचीबद्ध प्रक्रियाओं के कारण हुई है, न कि नए अधिग्रहणों के कारण।

Waqf Board Supreme Court Hearing: सुप्रीम कोर्ट पर वक्फ कानून पर बुधवार को भी सुनवाई हो रही है। आज केंद्र सरकार की ओर से वक्फ कानून के सपोर्ट में दलीलें रखी जा रही हैं। केंद्र ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कोई भी व्यक्ति सरकारी जमीन पर अधिकार का दावा नहीं कर सकता है और उसे कानूनी रूप से वक्फ द्वारा उपयोगकर्ता सिद्धांत का उपयोग करके वक्फ घोषित की गई संपत्तियों को पुनः प्राप्त करने का अधिकार है। उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ एक ऐसी अवधारणा है, जहां किसी संपत्ति को औपचारिक दस्तावेज के बिना भी धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए उसके दीर्घकालिक उपयोग के आधार पर वक्फ के रूप में मान्यता दी जाती है।

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वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

केंद्र की दलील

वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली दलीलों का जवाब देते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ के समक्ष केंद्र की ओर से अपनी दलीलें पेश करना शुरू किया। शीर्ष विधि अधिकारी ने कहा- "किसी को भी सरकारी जमीन पर अधिकार नहीं है।" उन्होंने कहा- "सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला है, जिसमें कहा गया है कि अगर संपत्ति सरकार की है और उसे वक्फ घोषित किया गया है, तो सरकार उसे बचा सकती है।"

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