Waqf Bill: वक्फ (संशोधन) विधेयक पर संसद की संयुक्त समिति बनने के बाद समिति के अंदर लगातार टकराव हो रहे हैं। कई सरकारी निकायों ने वक्फ बोर्डों पर उनकी संपत्तियों पर कब्जा रखने के आरोप लगाये हैं। वहीं, वक्फ बोर्ड की तरफ से भी आरोप लगाए गए हैं कि उनकी कई संपत्तियां सरकारी निकायों के अनाधिकृत कब्जे में हैं। इस बीच संसद की संयुक्त समिति ने हितधारकों, विशेषज्ञों और अन्य संस्थानों से प्रस्तावित कानून पर सुझाव मांगे हैं।
वक्फ बिल के खिलाफ वीडियो में किया जा रहा प्रचार।
वीडियो सोशल मीडिया पर हो रहा वायरल
संसद की संयुक्त समिति के सुझाव मांगने के बाद दिल्ली से एक वीडियो सामने आया है, जिसमें कुछ युवक हाथ में माइक लेकर लोगों से सुझाव देने की अपील कर रहे हैं। वीडियो में इन युवकों को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि अगर यह कानून आया तो आपसे आपकी मस्जिदें, ईदगाह और कब्रिस्तान छीन लिए जाएंगे। इस वीडियो को लेकर प्रशासनस वक्फ बोर्ड या किसी अन्य संगठन की तरफ से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
तेजी से वायरल हो रहे वीडियो पर गोड्डा से भाजपा सांसद और संयुक्त समिति के सदस्य निशिकांत दुबे ने भी प्रतिक्रिया दी है। निशिकांत दुबे ने कहा कि वीडियो को मन विचलित करने वाला बताते हुए कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक संसद की संयुक्त समिति के पास विचाराधीन है। मैं खुद इसका सदस्य हूं, यह वीडियो देखकर मन विचलित है। पूरे बिल को कम से कम 100 बार पढ़ चुका, इस बिल की कौन सी धारा में मस्जिद, कब्रिस्तान, दरगाह, मदरसा पर सरकार कब्जा करने का कानून ला रही है?' उन्होंने आगे कहा कि झूठ की बुनियाद,वोट बैंक की राजनीति और मोदी विरोध की अंधी राजनीति ने देश के एक वर्ग विशेष के मन में लगातार नफरत पैदा करने की कोशिश की है। काश वक्फ जिसकी बुनियाद पैगंबर मोहम्मद साहब ने गरीबों के लिए रखी, वक्फ की पहली कमिटी गैर मुस्लिम ने बनाई, उनके आदेश पर मुस्लिम समाज गरीब मुसलमानों के हित में सोचकर कमिटी को बताता।
जानें क्या है पूरा मामला?
केंद्र सरकार ने वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का सही रखरखाव और इससे जुड़े विवादों को कम करने के लिए वक्फ बोर्ड संसोधन कानून लाने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि यह कानून आने के बाद वक्फ बोर्ड की शक्तियां कम कर दी जाएंगी। इसी वजह से कुछ मुस्लिम नेताओं ने ऐसा कहा है कि यह कानून उनकी मस्जिदें और कब्रिस्तान छीनने के लिए लाया गया है। फिलहाल संसद की संयुक्त समिति इस कानून पर चर्चा कर रही है। लोगों से इस पर सुझाव मांगे गए हैं। संयुक्त समिति के सुझाव के बाद ही यह अधिनियम संसद में पेश होगा और चर्चा के बाद कानूनी का रूप लेगा।
