टीचर, डॉक्टर और वकील को गांव के लोग भगवान मानते थे, संविधान दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का इमोशनल स्पीच

  • Authored by: रामानुज सिंह
  • Updated Nov 26, 2022, 09:39 PM IST

सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयोजित संविधान दिवस (Constitution Day) समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) में दिल को छूने वाली बात कही। उन्होंने कहा कि मैं छोट गांव से आई हूं। जब मैंने जन्म लिया 1958 में, वहां कोई भी सुविधा नहीं थी। गांव के लोग टीचर, डॉक्टर और वकील को भगवान मानते थे।

दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयोजित संविधान दिवस (Constitution Day) समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) ने कहा कि मैं एक छोटे से गांव से आई हूं। जब मैंने जन्म लिया 1958 में, वहां कोई भी सुविधा नहीं थी। हम गांव के लोग तीन लोगों को भगवान मानते थे-टीचर, डॉक्टर और वकील। गुरू मनुष्य नहीं साक्षात ईश्वर है। डॉक्टर को भगवान मानते थे। क्योंकि वो जीवनदाता हैं। डॉक्टर और वकील के पास बहुत बार लोग जाते हैं। जो दुख में और परेशानी में होते हैं। उनके पास धन दौलत जमीन जायदाद जो भी हो, देने के लिए तैयार हो जाते हैं ताकि हमें परेशानी से मुक्ति मिले।

President Droupadi Murmu

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का इमोशनल भाषण

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मुकदमेबाजी की अत्यधिक लागत को न्याय प्रदान करने में एक बड़ी बाधा के रूप में संदर्भित किया। उन्होंने कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका से लोगों की दुर्दशा को कम करने के लिए एक प्रभावी विवाद समाधान तंत्र विकसित करने का आग्रह किया।

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