UP Election: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सुगबुगाहट तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में दिल्ली में सीएम योगी आदित्यनाथ ने पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं की ये मुलाकात प्रधानमंत्री आवास में हुई। जानकारी के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच करीब 1 घंटे तक मीटिंग चली।
सीएम योगी ने पीएम मोदी से मुलाकात की। Yogi Adityanath X handle
बता दें कि यूपी चुनाव को लेकर बीजेपी ने अपनी कमर कस ली है। पार्टी की योजना के मुताबिक, किसी बूथ पर जितनी जातियों की मौजूदगी होगी, बूथ कमेटी में उन सभी को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की जाएगी। पार्टी का मानना है कि इससे अलग-अलग सामाजिक समूहों तक सीधे संपर्क स्थापित करने में आसानी होगी। इसके तहत जिस समाज से संपर्क करना है, उसी समाज के लोगों को संगठन में जिम्मेदारी देने की रणनीति अपनाई जा रही है। इसके जरिए पार्टी स्थानीय स्तर पर सामाजिक समूहों के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश करेगी।
विनोद तावड़े की बैठक के बाद तैयार हुआ प्लान
बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े को हाल ही में उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। उन्होंने 6 सितंबर को प्रदेश के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर संगठन और चुनावी तैयारियों को लेकर फीडबैक लिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक में जातीय समीकरण को आगामी चुनाव की प्रमुख चुनौतियों में से एक माना गया। पार्टी स्तर पर यह भी चर्चा हुई कि विपक्ष पीडीए, संविधान और आरक्षण जैसे मुद्दों को चुनावी रणनीति का हिस्सा बना सकता है। इसके बाद बूथ स्तर पर सभी सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाने पर जोर दिया गया।
18 हजार से ज्यादा बूथों पर खास फोकस
बीजेपी की ओर से कराए गए बूथवार अध्ययन में ऐसे 18 हजार से ज्यादा बूथ चिन्हित किए गए हैं, जहां 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की स्थिति मजबूत थी, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रदर्शन पहले जैसा नहीं रहा। इनमें करीब 80 फीसदी बूथ ग्रामीण क्षेत्रों में बताए गए हैं। अवध और पूर्वांचल के कई इलाकों में ऐसे बूथों की संख्या अधिक बताई गई है। पार्टी अब इन क्षेत्रों में संगठनात्मक गतिविधियां बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर संपर्क मजबूत करने की तैयारी कर रही है।
बीजेपी की रणनीति में बूथ कमेटियों को सामाजिक संपर्क का अहम माध्यम बनाया जा रहा है। पार्टी की योजना है कि हर सामाजिक समूह के लोगों को संगठन में जगह देकर स्थानीय स्तर पर संवाद को मजबूत किया जाए। इसके लिए बूथ पर मौजूद सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखते हुए जिम्मेदारियां तय की जाएंगी। जरूरत पड़ने पर वरिष्ठ पदाधिकारी भी स्थानीय कार्यकर्ताओं की मदद करेंगे। इस पूरी कवायद का उद्देश्य चुनाव से पहले संगठन की बूथ स्तर तक पहुंच को मजबूत करना है।
