दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने बेल की अपील खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि शरजील इमाम और उमर खालिद के खिलाफ UAPA के तहत पहली नजर में केस बनता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्री-ट्रायल हिरासत (मुकदमे से पहले की गिरफ्तारी) मनमानी तरीके से नहीं हो सकती। हालांकि, इस मामले में उमर ख़ालिद और शरजील इमाम की स्थिति अन्य आरोपियों से अलग है।
उमर खालिद को नहीं मिली जमानत
उमर खालिद को जमानत क्यों नहीं?
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनावई के दौरान कहा कि देश की सुरक्षा से जुड़े अपराधों के मामलों में कानून के तहत जमानत का अलग और सख्त मानदंड लागू होता है। अदालत ने कहा कि यदि उपलब्ध सामग्री से पुलिस के आरोप प्रथमदृष्टया सही प्रतीत होते हैं, तो हिरासत (कारावास) को प्राथमिकता दी जाएगी। लेकिन यदि ऐसा नहीं है, तो जमानत दी जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उमर खालिद और शरजील इमाम UAPA की धारा 43D(5) की कसौटी पर खरे नहीं उतरते। नतीजतन, उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गईं।
बाकी पांच आरोपियों को मिली जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले में पांच अन्य आरोपियों को जमानत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में आरोपी बाकी पांच लोगों, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दे दी है। इन पांचों को जमानत देते वक्त सुप्रीम कोर्ट ने 12 शर्तें लगाईं हैं।
10 दिसबंर को फैसला रखा था सुरक्षित
शीर्ष अदालत ने पिछले साल 10 दिसंबर को दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू तथा आरोपियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अभिषेक सिंघवी, सिद्धार्थ दवे, सलमान खुर्शीद और सिद्धार्थ लूथरा की दलीलें सुनने के बाद आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
दिल्ली दंगों का मुख्य साजिशकर्ता
उमर, शरजील और अन्य पर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों का “मुख्य साजिशकर्ता” होने का आरोप है। उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय न्याय संहिता (आईपीसी) के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। क्षेत्र में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क उठी थी।
