Uddhav Thackeray News: शिवसेना के 16 विधायकों को अयोग्य ठहराने का मामला अब बड़ी बेंच देखेगा। लेकिन पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने कई तल्ख टिप्पणी करते हुए राज्यपाल की भूमिका पर सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि पार्टी के अंदरूनी मामले में राज्यपाल को नहीं पड़ना चाहिए। उनके द्वारा फ्लोर टेस्ट कराए जाने का फैसला भी संविधान सम्मत नहीं था। लेकिन इसके साथ ही चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि अगर उद्धव ठाकरे इस्तीफा नहीं दिए होते तो उन्हें राहत मिल सकती थी। इसका अर्थ यह हुआ कि वो सीएम बने रह सकते थे। पीठ ने कहा कि अब वो इस्तीफा दे चुके हैं लिहाजा इस्तीफे को खारिज नहीं कर सकते। इसके साथ यह भी कहा कि यथास्थिति बहाल नहीं कर सकते। इसका अर्थछ यह हुआ कि उद्धव ठाकरे अब तभी सीएम बन सकते हैं जब वो दोबारा जीत कर विधानसभा में पहुंचे।
उद्धव ठाकरे के इस्तीफे पर सुप्रीम टिप्पणी
पांच बड़ी वजह
- उद्धव ठाकरे ने इस्तीफा देकर गलती की।
- फ्लोर टेस्ट का उन्हें सामना करना चाहिए था।
- विधायकों के अयोग्यता फैसला स्पीकर के हाथ में
- उद्धव के सलाहकार कमजोर निकले
- राज्यपाल के फैसले को चुनौती दे सकते थे।
उद्धव ठाकरे कब बने थे सीएम
2019 में जब महाराष्ट्र के नतीजे सामने आए तो बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को जादुई आंकड़े हासिल यानी कि 145 नंबर हासिल हो चुका था। लेकिन पहले सीएम कौन बनेगा इस पर बात बिगड़ी और दोनों के रास्ते अलग हो गए। इस बीच एक दिन सुबह देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार राजभवन में शपथ लेते हुए दिखाई दिए और उसके बाद राजनीति ने एक और मोड़ लिया। महाराष्ट्र की राजनीति में एक तरह का प्रयोग हुआ जिसमें एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस ने महाविकास अघाड़ी का गठन किया और 28 नवंबर 2019 को उद्धव ठाकरे बने। लेकिन तीन साल के बाद साल 2022 में शिवसेना के अंदर एकनाथ शिंदे विद्रोह कर बैठे और सरकार बनाने का दावा पेश किया। महाराष्ट्र के राज्यपाल ने उद्धव ठाकरे से फ्लोर टेस्ट के लिए कहा कि लेकिन उससे पहले 29 जून 2022 को सीएम पद से इस्तीफा दे दिया।
