TMC Alleges on BJP: भारतीय जनता पार्टी, बंगाल को 2 राज्यों में बांटने की तैयारी कर रही हैं। इसके तहत वह पश्चिम बंगाल से उत्तरी बंगाल को अलग करना चाहती है। तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा में यह आरोप लगाया है। पार्टी ने यह आरोप मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी के दो सांसदों और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के एक नेता के बीच हुई बैठक के बाद लगाया है। उसका कहना है कि यह बैठक राज्य में तृणमूल कांग्रेस की सरकार को अस्थिर करने के लिए आयोजित की गई थी। हालांकि तृणमूल कांग्रेस के इन आरोपों को भाजपा ने खारिज कर दिया है।
टीएमसी का भाजपा पर बड़ा आरोप
क्या है मामला
उत्तर बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो सांसदों और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के एक नेता के बीच हुई बैठक के मद्देनजर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने मंगलवार को दावा किया कि बैठक,क्षेत्र और राज्य सरकार को अस्थिर करने की साजिश का हिस्सा है। टीएमसी ने अपने मुखपत्र 'जागो बांग्ला' में यह आशंका जताई है कि बैठक 'दिसंबर तक राज्य सरकार को अस्थिर करने' के लिए आयोजित की गई।
इसके अलावा टीएमसी के प्रदेश महासचिव कुणाल घोष ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह सिर्फ एक शिष्टाचार मुलाकात नहीं है, बल्कि उत्तर बंगाल को अस्थिर करने के लिए एक बड़ी योजना का हिस्सा है। पिछले विधानसभा चुनावों में अपनी हार के बाद से, भाजपा या तो केंद्र शासित प्रदेश या अलग राज्य की मांग को तूल देकर बंगाल को विभाजित करने की कोशिश कर रही है।
Today, I called on Sri Ashok Bhattacharya, Ex-State Minister, former Mayor of SMC and MLA Siliguri at his residence… t.co/eXda3dDA0X
— ANI (@ANI) Oct 24, 2022
भाजपा ने क्या दी सफाई
तृणमूल कांग्रेस के इस आरोप पर भाजपा नेतृत्व और माकपा के अशोक भट्टाचार्य ने खंडन किया है। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक 'शिष्टाचार भेंट' थी।गौरतलब है कि भाजपा नेता एवं दार्जिलिंग से सांसद राजू बिष्ट ने सिलीगुड़ी के विधायक शंकर घोष के साथ सोमवार को सिलीगुड़ी के पूर्व महापौर और माकपा नेता अशोक भट्टाचार्य से उनके आवास पर मुलाकात की थी। इस बैठक की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी पोस्ट की गयी थीं। बिष्ट ने ट्वीट किया था,आज, मैंने दिवाली की बधाई देने के लिए अशोक भट्टाचार्य, पूर्व राज्य मंत्री, एसएमसी (सिलीगुड़ी नगर निगम) के पूर्व महापौर के आवास पर उनसे मुलाकात की। मेरे साथ सिलीगुड़ी के विधायक डॉ शंकर घोष और अन्य जिला और मंडल कार्यकर्ता भी थे।
