Delhi Police Parliament Security Ring: 20 जुलाई को राजधानी दिल्ली में हुए बड़े पैमाने पर प्रदर्शन और हिंसा के बीच संसद मार्ग की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस के शीर्ष अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पटेल चौक और रेल भवन के समीप बना सुरक्षा घेरा पूरे ऑपरेशन का सबसे रणनीतिक और संवेदनशील बिंदु था। यदि प्रदर्शनकारी इस आखिरी बैरिकेडिंग को तोड़कर आगे निकल जाते, तो वे सीधे संसद भवन के बेहद करीब पहुंच सकते थे, जिससे स्थिति अत्यधिक चिंताजनक हो सकती थी।
कौन हैं वो 3 IPS अफसर, जिन्होंने बचाया संसद का आखिरी सुरक्षा घेरा, नहीं टूटने दिया रेल भवन और पटेल चौक का मोर्चा
तीन IPS अधिकारियों के नेतृत्व में मजबूत मोर्चाबंदी
रेल भवन और पटेल चौक के पास संसद की ओर बढ़ रही हिंसक और उग्र भीड़ को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस के तीन वरिष्ठ अधिकारियों ने आगे बढ़कर कमान संभाली। सुरक्षा घेरे को सुरक्षित रखने वाले प्रमुख अधिकारी:
-एडिशनल सीपी (IFSO) मोनिका भारद्वाज: इन्होंने अपनी टीम के साथ रेल भवन के मुख्य मोड़ पर अभेद्य सुरक्षा चक्र तैयार किया।
-डीसीपी (नॉर्थ) राजा बांठिया: पटेल चौक मोर्चे पर भीड़ के दबाव को नियंत्रित करने और अग्रिम पंक्ति के पुलिसकर्मियों का मनोबल बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।
-डीसीपी (साउथ वेस्ट) अमित गोयल: इन्होंने संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त बल की तैनाती और रणनीतिक बैरिकेडिंग सुनिश्चित की।
इन तीनों आईपीएस अधिकारियों ने अपनी टीमों के साथ घंटों तक चले इस तनावपूर्ण गतिरोध में धैर्य, साहस और रणनीतिक सोच का परिचय दिया। प्रदर्शनकारियों द्वारा कई बार सुरक्षा घेरे पर हमला करने और आगे बढ़ने की कोशिशों को पुलिस ने बिना किसी बड़े नुकसान के पूरी तरह विफल कर दिया।
स्पेशल CP और DCP की रणनीतिक भूमिका
संसद क्षेत्र की सुरक्षा को अभेद्य बनाए रखने में दिल्ली पुलिस के शीर्ष नेतृत्व का समन्वय सबसे निर्णायक साबित हुआ।
-स्पेशल सीपी (लॉ एंड ऑर्डर) देवेश चंद्र श्रीवास्तव: पूरे ऑपरेशन की कमान संभालते हुए स्पेशल सीपी ने विभिन्न जिलों और विशेष यूनिटों के बीच निरंतर तालमेल बनाए रखा। उन्होंने पल-पल बदलते हालात पर नजर रखते हुए तुरंत अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के त्वरित फैसले लिए।
-डीसीपी (न्यू दिल्ली) सचिन शर्मा: नई दिल्ली जिले के डीसीपी के रूप में सचिन शर्मा ने सबसे संवेदनशील इलाकों में ग्राउंड पर मौजूद रहकर बल का नेतृत्व किया। चुनौतीपूर्ण माहौल के बावजूद उन्होंने पुलिस बल के बीच तालमेल और कानून-व्यवस्था को बनाए रखने में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पटेल चौक और रेल भवन का यह मोर्चा यदि टूट जाता, तो राजधानी में कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती थी। इन आईपीएस अधिकारियों के नेतृत्व और पुलिस बल की मुस्तैदी से संसद भवन परिसर पूरी तरह सुरक्षित रहा।
