उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने एक खास बातचीत में माफिया अतीक अहमद से लेकर चप्पल में एनकाउंटर करने वाला दिलचस्प किस्सा सुनाया। इलाहाबाद से ताल्लुक रखने वाले 1974 बैच के पूर्व आईपीएस अधिकारी विक्रम सिंह अपने धाकड़ हौसले और सख्त फैसले के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में आतंकवाद, संगठित अपराध और माफिया नेटवर्क के खिलाफ कई बड़े अभियान चलाए।
UP के पूर्व DGP विक्रम सिंह ने सुनाया चप्पल में एनकाउंटर वाला किस्सा
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चप्पल में एनकाउंटर की कहानी
पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने टाइम्स नेटवर्क की वरिष्ठ पत्रकार डॉ. रमा सोलंकी के साथ खास बातचीत में अपने कार्यकाल को याद करते हुए कुछ दिलचस्प किस्से साझा किए, जिनमें उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का गठन, चप्पल में एनकाउंटर, माफिया अतीक अहमद जैसे मुद्दे शामिल हैं। 1974 बैच के पूर्व आईपीएस अधिकारी चप्पल में भी एनकाउंटर करने के लिए जाने जाते हैं। खास बातचीत में उन्होंने कहा, ''जी हां, बिल्कुल किया है...जैसा होगा टरेन (Terrain), वैसी ही आपकी भाव-भंगिमा होगी... जिस तरह आपका इलाका हो, उस तरह आप आ जाएं, चप्पल की बात इसलिए अप्रासंगिक है, क्योंकि जब कोई दंगा, आगजनी या गोलीबारी शुरू होती है, तो एक अधिकारी के पास दो विकल्प होते हैं। पहला यह कि आप जैसे हैं, वैसे पहुंच जाएं... दूसरा विकल्प है कि आप जाकर कहें कि आपकी वर्दी तैयार की जाए और महंगे घुटने तक वाले जूते पहनें... क्या दंगाई गुलदस्ता लेकर आपका इंतजार कर रहा है कि आप तैयार होकर आएंगे...।" उन्होंने कहा कि अगर आप सैनिक हैं तो गाड़ी में सुसज्जित होकर तुरंत पहुंचे और वायरलेस में कहें कि आस-पास के सभी थानों की फोर्स मौके पर पहुंचे और जब आप मौके पर पहुंचे तो आगे से नेतृत्व करें... उन्होंने कहा कि अगर आप आगे नहीं रहेंगे तो कोई आपका नेतृत्व स्वीकार नहीं करेगा।
उत्तर प्रदेश STF का गठन
इस दौरान, पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने उत्तर प्रदेश में एसटीएफ (Special Task Force) के गठन और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि एसटीएफ का गठन 1995-96 के आसपास हुआ था, जब अपराध के स्वरूप में बदलाव आया और 'फास्ट मूविंग क्राइम' (तेजी से होने वाले अपराध) की शुरुआत हुई। उन्होंने खूंखार गैंगस्टर श्रीप्रकाश शुक्ला के समय को याद करते हुए बताया कि उस समय श्रीप्रकाश शुक्ला जैसे अपराधियों के पास पेजर, AK-47 और उजी सबमशीन गन जैसे उन्नत हथियार और तेज रफ्तार कारे थीं। जबकि हमारे पास सीमित संख्या में एसएलआर (SLR) या .303 राइफलें थीं... अब समय बदल गया। पुलिस के पास अब फास्ट मूविंग कारें हैं। वो इक्विपमेंट और वो फायर पावर है, जो उनको तो छोड़ दीजिए, शायद अच्छे-अच्छे आर्मी के पास नहीं है। विक्रम सिंह ने बातचीत के दौरान, पुलिस के पास मौजूद अत्याधुनिक तकनीक का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि सेंसर थर्मल जैसी तकनीक है। अगर हमें किसी होटल के कमरे में जाना है तो हमें मालूम पड़ जाएगा कि वहां पर कितने लोग हैं, कहां बैठे हैं, कौन वाशरूम में है...।
थर्ड डिग्री पर क्या बोले UP के पूर्व डीजीपी
पूर्व डीजीपी ने थर्ड डिग्री पर भी खुलकर बात की और बताया कि उन्होंने कभी थर्ड डिग्री का इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने कहा, ''मैं आपको एक मिसाल बताता हूं, मैंने एक किताब 'ह्यूमन राइट्स एंड पुलिस' लिखी है, लेकिन जब मैं दिल्ली में मानवाधिकार कॉन्फ्रेंस में आता था तो लोग कहते थे कि सर आप यहां पर कैसे आएं? यह मानवाधिकार कॉन्फ्रेंस है? मानव अधिकार अगर नॉर्थ पोल है तो आप तो साउथ पोल है, लेकिन अच्छा बदनाम हो रहा...'' उन्होंने आगे कहा, ''मैंने कभी थर्ड डिग्री नहीं की है, लेकिन मैं यह कह दूं कि थर्ड डिग्री नहीं होती है तो वह एक सफेद झूठ होगा। थर्ड डिग्री होती है और खूब होती है...।'' उन्होंने कहा कि आज के समय पर आपके पास लाई डिटेक्टर, पॉलीग्राफ टेस्ट, इलेक्ट्रॉनिक सर्वेलेंस, ब्रेन मैपिंग जैसी टेक्नोलॉजी है। आपको सबकुछ टेक्नोलॉजी दे देगी और किसी को भी स्पर्श करने की जरूरत नहीं है।
