शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) के इस्तीफे के बाद कांग्रेस ने सरकार पर बड़ा हमला कर दिया है। कांग्रेस धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी थी, जिसके कारण संसद तक नहीं चल पा रहा था। अब इस्तीफे के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) ने एक्स पर पोस्ट कर कहां कि ‘छात्रों की गूंज’ आखिरकार अंहकारी सत्ता की दहलीज तक पहुंच गई।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (फाइल फोटो- PTI)
क्या-क्या होले मल्लिकार्जुन खरगे?
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, "भारत के ‘छात्रों की गूंज’ आखिरकार अंहकारी सत्ता की दहलीज तक पहुंच गई। ये हमारे करोड़ों युवाओं की जीत है जिन्होंने देशभर में शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सड़क पर आवाज उठाई। ये सत्य की जीत है और मोदी जी के हठ की हार है। ये उन सभी परिवारों की जीत हैं जिन्होंने अपने खून, अपने बच्चों को खोया, क्योंकि यह सरकार भ्रष्टाचारी है। ये साझा विपक्ष की जीत है, जिन्होंने छात्रों के हित में संसद से सड़क तक आवाज उठाई। अब बारी है मोदी जी को हमारी युवा पीढ़ी से माफी मांगने की और जिन्होंने उनपर लाठी-डंडे-पैलेट गन चलवाई है, उनपर कठोर कार्यवाही करने की।"
केसी वेणुगोपाल ने क्या कहा?
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भारत के युवाओं की जीत है। उन्होंने लिखा, "आपकी ताकत ने अयोग्य, भ्रष्ट और दोषी धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया! यह जनता की जीत है, उन सभी की जीत है जिन्होंने हमारी व्यवस्था में जवाबदेही के लिए लड़ाई लड़ी। जिस पल से नीट (NEET) का पेपर लीक हुआ था, उसी समय से कांग्रेस और विशेष रूप से राहुल गांधी उनके इस्तीफे की मांग कर रहे थे। एक एकजुट तरीके से, विपक्ष जवाबदेही की एक साझा मांग के साथ इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कर रहा था। हमारी अन्य मांगें हैं - हमारे छात्रों पर हमला करने वालों के लिए सजा, और छात्रों द्वारा झेली गई प्रताड़ना के लिए प्रधानमंत्री से माफी। हालांकि, शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए हमारा आंदोलन जारी रहेगा। जब तक हम व्यवस्था में निष्पक्षता नहीं लाते, छात्रों द्वारा झेले जाने वाले दबाव को कम नहीं करते और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार नहीं करते, तब तक हम शांत नहीं बैठेंगे। देश भर के उन लाखों छात्रों को सलाम जिन्होंने इस सरकार को अपनी इच्छा के आगे झुकने पर मजबूर किया, और राहुल गांधी जी को भी - जो उनके उद्देश्य के सबसे मुखर, सच्चे और प्रतिबद्ध समर्थक बने रहे।"
