ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने प्रयागराज के एक स्कूल में यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति मांगने वाली याचिका को खारिज करने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले का कड़ा विरोध किया है। ओवैसी ने अदालत के फैसले से असहमति जताते हुए कहा कि अदालत का यह फैसला गलत है और यह सीधे तौर पर इस्लाम पर हमला है। हैदराबाद में मंगलवार रात मिलाद-उन-नबी के अवसर पर आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए एआईएमआईएम प्रमुख ने हिजाब मुद्दे के साथ-साथ 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर अपनी पार्टी की रणनीति और कई केंद्रीय मुद्दों पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
हिजाब विवाद पर ओवैसी का सख्त बयान
2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मांगी मदद
हैदराबाद के सांसद ओवैसी ने जनता से 2027 के यूपी विधानसभा चुनावों में AIMIM का समर्थन करने और पार्टी उम्मीदवारों की सफलता के लिए दुआ करने की अपील की। ओवैसी ने सवाल उठाया, जब देश में हर समुदाय का अपना नेतृत्व हो सकता है, तो मुसलमानों का क्यों नहीं होना चाहिए? उन्होंने कहा कि पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव में 5 सीटें जीती थीं और उन्हें उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश में भी अल्लाह उनकी पार्टी को सफलता देगा। उन्होंने आगे कहा कि जिन्हें उन पर आरोप लगाने हैं, लगाने दीजिए। ओवैसी ने कहा कि 18 करोड़ आबादी वाले समुदाय के देश की संसद में सिर्फ 24 सांसद हैं और उनके लिए बोलने वाला कोई नहीं है।
'वंदे मातरम' विवाद पर पीएम मोदी पर निशाना
'वंदे मातरम' से जुड़े विवाद पर हमला बोलते हुए ओवैसी ने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और महात्मा गांधी ने तय किया था कि इसके केवल दो छंद ही गाए जाएंगे। ओवैसी ने पूछा कि क्या नरेंद्र मोदी, महात्मा गांधी या रवींद्रनाथ टैगोर से बड़े बुद्धिजीवी या देशभक्त हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी और पीएम मोदी इस पर कानून बनाकर रवींद्रनाथ टैगोर, नेताजी बोस और महात्मा गांधी का अपमान कर रहे हैं।
समान नागरिक संहिता (UCC) और RSS पर हमला
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्र सरकार को घेरते हुए ओवैसी ने कहा कि यूसीसी (UCC) पर बात करने से पहले सरकार को देश में 11 करोड़ बेरोजगारों को रोजगार देने पर बात करनी चाहिए। उत्तराखंड, असम और गुजरात में पारित यूसीसी कानूनों का जिक्र करते हुए ओवैसी ने कहा कि 'समानता और एकरूपता' में अंतर होता है। हिंदू विवाह और उत्तराधिकार कानूनों को मुसलमानों पर थोपा जा रहा है, जिसमें सरकार कभी सफल नहीं होगी।
आरएसएस पर आरोप लगाते हुए ओवैसी ने दावा किया कि 1949 में संविधान बनने के चार दिन बाद ही आरएसएस ने इसकी शिकायत की थी और देश के कानून के बजाय मनुस्मृति की मांग की थी।
