देश

'देश में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी व्यवस्था नहीं', तमिलनाडु के DGP ने जनता को किया आगाह

ET Now.in Realty Conclave & Awards 2026 South Edition: तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक डॉ मुकेश कुमार अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि भारतीय कानूनी व्यवस्था में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई व्यवस्था नहीं है।

Image

तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक (DGP) डॉ मुकेश कुमार अग्रवाल

Photo : Times Now Digital

तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक (DGP) डॉ मुकेश कुमार अग्रवाल ने गुरुवार को ET Now.in Realty Conclave & Awards 2026 South Edition कार्यक्रम में पुलिस सुधारों, साइबर अपराध, महिला सुरक्षा और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर विस्तार से चर्चा की।

डीजीपी मुकेश कुमार के मुताबिक, तमिलनाडु पुलिस आधुनिक तकनीक, ई-सेवाओं और जन-भागीदारी के जरिए पुलिसिंग का एक नया खाका तैयार कर रही है। उन्होंने पुलिस सुधारों को निरंतर चलने वाली प्रक्रिया बताते हुए कहा कि अब ई-एफआईआर और कम्युनिटी सर्विस रजिस्टर के लिए ई-सीएसआर जैसी संपर्क-रहित सेवाएं शुरू की जा रही हैं।

डीजीपी मुकेश कुमार ने कहा कि पुलिसकर्मियों को जनता के प्रति बेहतर व्यवहार के लिए नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही, 24x7 काम करने वाले पुलिसकर्मियों की कार्य स्थितियों में सुधार करने और पुलिस-जनसंख्या अनुपात को बेहतर बनाने के प्रयास जारी हैं।

'पुलिसकर्मियों को दी जा रही मेंटल हेल्थ ट्रेनिंग'

पुलिसकर्मियों की मेंटल हेल्थ पर बात करते हुए डीजीपी मुकेश कुमार ने बताया कि बेंगलुरू स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (NIMHANS) के सहयोग से तमिलनाडु पुलिस बल के लगभग दो-तिहाई कर्मियों को मेंटल हेल्थ ट्रेनिंग दी जा रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह का प्रशिक्षण पुलिसकर्मियों को काम के दबाव और तनाव से निपटने में मदद करता है।

'डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज नहीं'

साइबर अपराधों को गंभीर चुनौती बताते हुए उन्होंने जनता को आगाह करते हुए कहा कि भारतीय कानूनी व्यवस्था में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे किसी भी फर्जी कॉल से डरने के बजाय तत्काल निकटतम पुलिस स्टेशन से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष तमिलनाडु में साइबर अपराधों के कारण 2,100 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था, जो पारंपरिक अपराधों की तुलना में 10 गुना से भी अधिक था। इस वर्ष जागरूकता अभियानों से कम से कम 400 करोड़ रुपये बचाने का लक्ष्य रखा गया है।

'संदिग्ध लेन-देन पर रोक की कोशिश'

उन्होंने आगे बताया कि बैंकों के साथ मिलकर संदिग्ध लेन-देन रोकने पर काम किया जा रहा है और एक लाख से अधिक की साइबर धोखाधड़ी पर महज एक फोन कॉल से 'जीरो एफआईआर' दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

AI, CCTV जैसी तकनीकों का हो रहा इस्तेमाल

अपराधों की रोकथाम और जांच में तकनीक की बढ़ती भूमिका का जिक्र करते हुए डीजीपी ने बताया कि पुलिस फेशियल रिकग्निशन, सीसीटीवी और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर रही है।

तमिलनाडु में महिला सुरक्षा के लिए विशेष बल

महिला और बाल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए डीजीपी मुकेश कुमार ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकताओं के तहत 2,000 से अधिक महिला पुलिसकर्मियों की 'सिंगापेन्ने स्पेशल फोर्स' गठित की गई। यह बल स्कूलों, कॉलेजों और आवासीय इलाकों में जाकर लोगों को सुरक्षा, अपराध की रोकथाम और शिकायत दर्ज कराने के प्रति जागरूक करता है।

बकौल डीजीपी, जागरूकता बढ़ने से महिलाएं निडर होकर पुरानी घटनाओं की शिकायत दर्ज कराने के लिए भी आगे आ रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अन्य राज्य भी इस मॉडल को अपनाने की योजना बना रहे हैं।

Anurag Gupta
अनुराग गुप्ताauthor

अनुराग गुप्ता टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और मीडिया में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं। जर्नलिज़्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से ही वे न्यूजरूम के विभिन्न आयामों—कॉपी एडिटिंग, कंटेंट क्यूरेशन और रियल-टाइम न्यूज मॉनिटरिंग में दक्षता के साथ काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और ब्रेकिंग न्यूज पर उनकी मजबूत पकड़ है। अनुराग खबरों की बारीकियों को समझने, फैक्ट चेकिंग और स्टोरी के अहम पहलुओं को पाठकों तक सरल भाषा में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अब तक 10 हजार से अधिक खबरें प्रकाशित की हैं, जिनमें ब्रेकिंग अपडेट्स, एनालिटिकल कंटेंट, स्पेशल स्टोरीज और न्यूज एक्सप्लेनर्स शामिल हैं।

और पढ़ें
End of Article