'छाती पकड़ना और पायजामा की डोरी तोड़ने का मतलब यह नहीं...', इलाहाबाद HC के आदेश पर SC ने लिया स्वत: संज्ञान; आखिर क्या है पूरा मामला

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस विवादित आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें कहा गया था कि नाबालिग की छाती पकड़ना और पायजामा की डोरी तोड़ना स्वतः बलात्कार के इरादे को साबित नहीं करता। शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि आरोपी पर IPC की धारा 376, 511 और POCSO एक्ट के तहत ट्रायल जारी रहे।

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस विवादित आदेश पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की, जिसमें कहा गया था कि नाबालिग की छाती पकड़ना और पायजामा की डोरी तोड़ना अपने आप यह साबित नहीं करता कि आरोपी बलात्कार के इरादे से आया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाई और कहा कि ट्रायल कोर्ट आरोपी को IPC की धारा 376, 511 और POCSO के प्रावधानों के तहत करे।

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सुप्रीम कोर्ट ने रेप मामले में लिया स्वत: संज्ञान।(फोटो सोर्स: AP)

लड़की के साथ छेड़छाड़ को लेकर क्या बोले वकील?

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि हाई कोर्ट का आदेश सेट असाइड किया जाएगा और ट्रायल जारी रहेगा। सुनवाई में सीनियर एडवोकेट शोभा गुप्ता ने बताया कि इलाहाबाद, कलकत्ता और राजस्थान हाई कोर्ट में भी ऐसे असंवेदनशील टिप्पणियां की गई हैं। एक वकील ने यह भी बताया कि आज ही एक सेशन कोर्ट की इन-कैमरा कार्यवाही में एक लड़की के साथ छेड़छाड़ हुई।

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