'मस्जिद में महिलाओं की एंट्री पर रोक नहीं', ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की सुप्रीम कोर्ट में दलील

सुप्रीम कोर्ट की नौ-न्यायाधीशों की संविधान पीठ के सामने सबरीमाला संदर्भ मामले की सुनवाई के दौरान ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने दलील दी कि मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश पर इस्लाम में कोई रोक नहीं है। वरिष्ठ अधिवक्ता एम.आर. शमशाद ने कहा कि मस्जिद में ‘सैंक्टम सैंक्टोरम’ जैसी कोई अवधारणा नहीं होती और महिलाएं चाहें तो नमाज के लिए आ सकती हैं, हालांकि उनके लिए जमात में शामिल होना अनिवार्य नहीं है।

सबरीमाला रेफरेंस मामले की सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की नौ-न्यायाधीशों की बेंच के सामने 8 वें दिन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने दलील दी है कि मस्जिदों में नमाज अदा करने के लिए महिलाओं के प्रवेश पर कोई रोक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की इस संविधान पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना, एम.एम. सुंद्रेश, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, अरविंद कुमार, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, प्रसन्ना बी. वराले और जॉयमाल्य बागची शामिल हैं।

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मस्जिद में ‘गर्भगृह’ जैसी कोई अवधारणा नहीं: Supreme Court of India में AIMPLB का पक्ष।

वरिष्ठ अधिवक्ता एमआर शमशाद ने एआईएमपीएलबी की ओर से यह दलीलें पेश कीं। यह मुद्दा उन याचिकाओं के साथ जुड़ा है, जिनमें मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश की मांग की गई है और जिन्हें सबरीमाला संदर्भ के साथ टैग किया गया है।

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