सुप्रीम कोर्ट ने 5 सितंबर को प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी के मार्च के खिलाफ फिलहाल कोई निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभी ऐसी कोई मजबूर परिस्थिति सामने नहीं है, जिसके आधार पर यह माना जाए कि मार्च के दौरान कुछ गलत होगा। CJI सूर्यकांत ने कहा ने कहा कि हम यह मानकर चलेंगे कि सभी लोग जिम्मेदारी और शांतिपूर्ण तरीके से व्यवहार करेंगे। कोर्ट ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। CJI ने कहा कि यह सरकार का कर्तव्य है कि वह कानून-व्यवस्था बनाए रखे। हमें पूरा भरोसा है कि वे कानूनी दायरे में रहकर कार्रवाई करेंगे।
CJP के इंडिया गेट मार्च पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार (फोटो- PTI)
SC ने याचिका SG के सामने रखने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अर्जी को सॉलिसिटर जनरल के सामने रखा जाए और लंबित याचिकाओं के साथ मामले की सुनवाई की जाए। CJI ने कहा कि याचिकाकर्ता संबंधित सरकार से संपर्क कर सकता है। अगर कोई गंभीर या चिंताजनक स्थिति पैदा होती है तो कानून के दायरे में रहते हुए दोबारा सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जा सकता है।
'अभी ऐसी कोई मजबूर परिस्थिति नहीं'
कोर्ट ने साफ किया कि फिलहाल उसके सामने ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है, जिसके चलते वह यह मान ले कि मार्च के दौरान कानून-व्यवस्था बिगड़ेगी। CJI सूर्यकांत ने कहा कि मामले में दो पहलू हैं- एक कानून-व्यवस्था और दूसरा नीति से जुड़ा मुद्दा। कोर्ट ने कहा कि संबंधित पक्षों को सरकार के साथ बातचीत करने देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से कानून का पालन करने और शांतिपूर्ण तरीके से व्यवहार करने की उम्मीद जताई है।
10 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले को लंबित याचिकाओं के साथ सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। अब मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि अर्जी की पूरी कॉपी संबंधित हाई पावर कमेटी के सामने रखी जाए, ताकि याचिकाकर्ता की ओर से उठाई गई चिंताओं पर भी वह विचार कर सके।
'सोशल मीडिया पर मार्च का ऐलान, अनुमति ली गई या नहीं पता नहीं'
डॉ. रिजवान ने कहा कि यह अर्जी एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी की ओर से नए घटनाक्रम के कारण दाखिल की गई है। उन्होंने कहा कि मामला हाई पावर कमेटी के सामने जा चुका है और सभी पक्ष वहां अपना पक्ष रख सकते हैं। उन्होंने कहा, "एक दुर्भाग्यपूर्ण और अप्रिय घटनाक्रम हुआ है। दिल्ली में, जो संवेदनशीलता का केंद्र है, वहां मार्च सिर्फ प्रस्तावित नहीं किया गया बल्कि सोशल मीडिया पर उसका ऐलान किया गया है।" उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी के मुताबिक अभी तक मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई है।
'प्रदर्शन के अधिकार को कोई चुनौती नहीं दे सकता'
वकील ने कहा कि अगर दूसरा पक्ष सरकार से अपनी मांग मनवाने के लिए मार्च करना चाहता है तो उसे प्रदर्शन का अधिकार है। लेकिन सवाल यह है कि इसके लिए कौन सी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था को लेकर आशंकाएं कई बार पुराने अनुभवों पर आधारित होती हैं। धीरे-धीरे ऐसी चीजें कानून तोड़ने की स्थिति में बदल सकती हैं।
डॉ. रिजवान ने ब्रिक्स सम्मेलन का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि 12 और 13 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय मेहमान दिल्ली में होंगे और ऐसे समय में राजधानी में किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था की समस्या का असर देश की छवि पर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि अगर मामूली लाठीचार्ज भी होता है तो सवाल उठेंगे कि उपद्रवी तत्व कैसे पहुंचे और पुलिस क्या कर रही थी। इसके बाद विदेशी मीडिया में दिल्ली की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ सकते हैं।
डॉ. रिजवान ने कहा कि उनकी आशंकाएं काल्पनिक नहीं हैं। उन्होंने पिछले AI समिट के दौरान हुई घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि वहां लोगों के कपड़े उतारकर नाचने जैसी घटनाएं हुई थीं। उन्होंने कहा, "प्रदर्शन के अधिकार को कोई चुनौती नहीं दे सकता। सवाल यह है कि किस प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।"
'क्या 10 दिन BRICS Summit खत्म होने तक इंतजार नहीं कर सकते?'
डॉ. रिजवान ने यह भी सवाल उठाया कि जिन लोगों के नाम FIR में हैं, क्या पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी कर रही है? उन्होंने कहा कि इसका जवाब 'नहीं' है। उन्होंने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी की जो भी मांगें हैं, वे उनके लिए प्रासंगिक हो सकती हैं और वह इस बात को स्वीकार करते हैं। लेकिन क्या BRICS Summit खत्म होने तक 10 दिन इंतजार नहीं किया जा सकता?
