Bharat Tiwari Encounter: बिहार के भोजपुर में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने को कहा। जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की बेंच ने केस सुनने से इनकार किया। सुप्रीम कोर्ट के वकील विशाल तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट मे याचिका दाखिल कर CBI जांच की मांग की थी। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अगुवाई में स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने की भी मांग की गई थी। याचिका में मांग की गई थी कि एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए और मामले की जांच CBI से कराई जाए।
भरत तिवारी केस में SC ने क्या कहा?
भरत तिवारी की मौत में पुलिसकर्मियों पर मामला दर्ज
बता दें कि मुठभेड़ में भरत तिवारी की मौत के पांच दिन बाद उसके परिजनों की शिकायत पर शाहपुर थाना में हत्या का मामला दर्ज किया गया था। दर्ज एफआईआर में जगदीशपुर के एसडीपीओ राजेश शर्मा और शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार को नामजद आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा एनकाउंटर के दौरान मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों को भी मामले में शामिल किया गया है। भरत तिवारी की मौत को लेकर शुरू से ही परिजन, स्थानीय लोग और विभिन्न राजनीतिक दल सवाल उठाते रहे हैं। मामले को लेकर लगातार बढ़ते विवाद और राजनीतिक दबाव के बीच राज्य सरकार ने भी संज्ञान लिया है। बढ़ते सियासी विवाद को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश से जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
क्या गुनाह था भरत तिवारी का?
भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में भरत तिवारी उर्फ भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में एक नया मुकदमा दर्ज किया गया था। यह एफआईआर भरत तिवारी की मां आशा देवी की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया है कि 17 जून की सुबह डीएसपी और थानाध्यक्ष के नेतृत्व में पुलिस टीम उनके घर पहुंची और भरत को अपने साथ लेकर जवइनिया बाढ़ विस्थापितों के लिए आवंटित भूमि वाले इलाके में गई। बताया गया है कि भरत इस क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं को फेसबुक लाइव के माध्यम से लगातार उठाता रहा था। मां आशा देवी के अनुसार, घटनास्थल पर पहुंचने के बाद भरत ने अपना हथियार पुलिस के सामने डालकर आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने उसे धक्का देकर एक गड्ढे में गिरा दिया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि मौके पर मौजूद डीएसपी के निर्देश पर पुलिस ने उस पर फायरिंग की, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। बाद में उसे वाहन में बैठाकर ले जाया गया और शाम को पुलिस की ओर से उसकी मौत की सूचना दी गई।
