सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के मामले में एफआईआर रद्द करने के अपने फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता ने अदालत से प्रदर्शन के संबंध में दर्ज एफआईआर की जांच निष्पक्ष तरीके से सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देने की मांग की थी। इस दौरान सीजेपी ने कहा कि अदालत के सामने युवा छात्र हैं और उन्हें उनके माता-पिता और उनके पूरे जीवन को ध्यान में रखकर फैसला लेना होगा।
CJP प्रदर्शन मामले में FIR पर सुप्रीम कोर्ट ने नहीं सुनी याचिका। ANI
'हम नहीं चाहते कि वे मुकदमों में उलझें'
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा, “आप कह रहे हैं कि हमें एफआईआर रद्द नहीं करनी चाहिए थी! ये युवा छात्र हैं, जो हमारे सामने आए थे। हमें उनके माता-पिता और उनके पूरे जीवन को देखना होगा। हम नहीं चाहते कि वे मुकदमों में उलझें और अदालतों के चक्कर लगाते रहें।” याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि इस मामले में एक संदेश जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि लोग अदालतों में इस तरह आते हैं, जैसे अदालतें उनकी निजी संपत्ति हों।
सीजीआई बोले- दूसरे मामलों में भी रद्द किए गए हैं मुकदमे
इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि याचिकाकर्ता ने दूसरे मामलों में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को नहीं देखा है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामले भी अदालत के सामने आए थे, जिनमें सांसदों और विधायकों ने धरना दिया था और कोविड के दौरान प्रदर्शन किए थे। सीजीआई ने कहा कि उन मामलों में भी अदालत ने यह कहते हुए मुकदमे रद्द करने की अनुमति दी थी कि संबंधित लोग आदतन अपराधी नहीं हैं।
'आपकी याचिका मूल रूप से रिव्यू याचिका है'
मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता की दलीलों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उसकी याचिका मूल रूप से एक रिव्यू याचिका है। इसके जरिए अदालत के पहले के फैसले को गलत ठहराने की मांग की जा रही है। याचिका में जंतर-मंतर पर जुलाई में हुए सीजेपी प्रदर्शन के संबंध में दर्ज एफआईआर रद्द करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए गए थे। याचिकाकर्ता ने इन FIR की जांच निष्पक्ष तरीके से कराए जाने के लिए निर्देश देने की मांग की थी।हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।
