UP के विधायकों की पेंशन-भत्तों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त! सरकार को नोटिस, याचिका पर मांगा जवाब

'लोक प्रहरी' का तर्क है कि संविधान का अनुच्छेद 195 राज्य विधानमंडल को अपने सदस्यों को वेतन और भत्ते देने का अधिकार देता है, लेकिन इसमें पेंशन या रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले लाभों का स्पष्ट रूप से कोई जिक्र नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 'लोक प्रहरी' की याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें उत्तर प्रदेश के उस कानून के प्रावधानों को चुनौती दी गई है जो राज्य विधानसभा और विधान परिषद के मौजूदा और पूर्व सदस्यों को वेतन, भत्ते, पेंशन और अन्य सुविधाएं देते हैं। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार, विधानसभा और विधान परिषद के प्रधान सचिवों को नोटिस जारी किया। यह याचिका 'लोक प्रहरी' के महासचिव एसएन शुक्ला ने दायर की थी, जो खुद अदालत में पेश हुए थे।

Supreme Court

UP के विधायकों की पेंशन-भत्तों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त! (फाइल फोटो)

इस मामले की सुनवाई के लिए फिलहाल 9 अक्टूबर की तारीख तय की गई है।याचिका में उत्तर प्रदेश राज्य विधानमंडल (सदस्यों के वेतन-भत्ते और पेंशन) अधिनियम, 1980 के कई प्रावधानों को चुनौती दी गई है। इनमें निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, रेलवे कूपन, यात्रा भत्ता, दैनिक भत्ता, सदस्यों को दिए जाने वाले लोन और पूर्व विधायकों व एमएलसी और उनके परिवारों को मिलने वाले पेंशन लाभ शामिल हैं।

End of Feed