भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को उनकी अलग रह रही पत्नी द्वारा दायर याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को नोटिस जारी किया है। इस याचिका में शमी की पत्नी ने अपने और अपनी नाबालिग बेटी के लिए दिए गए अंतरिम भरण-पोषण में बढ़ोतरी की मांग की है।न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने यह नोटिस जारी करते हुए शमी से जवाब मांगा है। यह मामला कलकत्ता उच्च न्यायालय के 1 जुलाई और 25 अगस्त 2024 के आदेशों को चुनौती देने से जुड़ा है। उच्च न्यायालय ने पहले शमी को आदेश दिया था कि वे अपनी पत्नी को प्रति माह ₹1.5 लाख और बेटी को ₹2.5 लाख का भरण-पोषण दें, साथ ही बकाया राशि आठ मासिक किस्तों में चुकाएं।
मोहम्मद शमी और हसीन जहां (फाइल फोटो- PTI)
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10 लाख हर महीने की मांग
शमी की पत्नी का कहना है कि क्रिकेटर की वित्तीय स्थिति और आलीशान जीवनशैली को देखते हुए यह रकम बहुत कम है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अपने लिए ₹7 लाख प्रतिमाह और बेटी के लिए ₹3 लाख प्रतिमाह भरण-पोषण तय करने की मांग की है। याचिका में यह भी बताया गया है कि शमी की वार्षिक आय 2021-22 में लगभग ₹48 करोड़ थी, जबकि वे अपनी पत्नी और बेटी को “दयनीय परिस्थितियों” में छोड़ चुके हैं। उनका कहना है कि वे बुनियादी खर्च पूरे करने के लिए भी संघर्ष कर रही हैं।
2014 में की थी शादी
शमी और उनकी पत्नी ने अप्रैल 2014 में शादी की थी। वर्ष 2018 में पत्नी ने घरेलू हिंसा के आरोप लगाते हुए कोलकाता के जादवपुर पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसके बाद शमी के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई थी। इसके बाद उन्होंने घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा अधिनियम के तहत अंतरिम भरण-पोषण की मांग की थी। निचली अदालत ने पहले केवल बच्चे के लिए ₹80,000 प्रतिमाह स्वीकृत किए थे और पत्नी की मांग खारिज कर दी थी। इस फैसले के खिलाफ अपील पर सत्र न्यायालय ने 2023 में पत्नी के लिए ₹50,000 और बच्चे के लिए ₹80,000 प्रतिमाह का भरण-पोषण तय किया था। बाद में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने इन राशियों को बढ़ाकर क्रमशः ₹1.5 लाख और ₹2.5 लाख कर दिया।
