असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के वीडियो और बयानों के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार हो गया है। सुप्रीम कोर्ट में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने असम सीएम के खिलाफ याचिका दाखिल की है और जल्द सुनवाई की मांग की है। इस याचिका पर टिप्पणी करते हुए भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा कि समस्या यह है कि जैसे ही चुनाव आते हैं, चुनाव का कुछ हिस्सा शीर्ष अदालत में लड़ा जाता है।
असम सीएम के विवादित वीडियो के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को सूचीबद्ध करने पर जताई सहमति
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को वामपंथी नेताओं की उस याचिका को सूचीबद्ध करने के लिए विचार करने पर सहमति जताई, जिसमें सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए एक कथित वीडियो को लेकर असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध किया गया है। इस वीडियो में शर्मा एक विशेष समुदाय के लोगों की ओर राइफल से निशाना साधते हुए नजर आ रहे हैं। हालांकि, बाद में इस वीडियो को सोशल मीडिया से हटा दिया गया। भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की अगुवाई वाली पीठ ने, वकील निजाम पाशा की दलीलों पर संज्ञान लेते हुए कहा कि वह याचिका को सूचीबद्ध करने पर विचार करेगी।
क्या है असम सीएम पर आरोप
पाशा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के कुछ नेताओं की ओर से पेश हुए थे। उन्होंने पीठ के समक्ष कहा, ’’हम इस अदालत से असम के मौजूदा मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए चिंताजनक बयानों और हाल में पोस्ट किए एक वीडियो को लेकर तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध करते हैं। इस संबंध में शिकायतें दर्ज कराई गई हैं, लेकिन अब तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है।’’ इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि समस्या यह है कि जैसे ही चुनाव आते हैं, चुनाव का एक हिस्सा उच्चतम न्यायालय में लड़ा जाता है। यही समस्या है। हम मामले को देखेंगे और तारीख देंगे।
क्या है पूरा मामला
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा का एक कथित वीडियो भारतीय जनता पार्टी की असम इकाई ने सात फरवरी को अपने आधिकारिक ’एक्स’ खाते से साझा किया था जिसमें में शर्मा को राइफल से दो लोगों की ओर निशाना साधते हुए देखा जा सकता है -जिनमें से एक ने टोपी पहनी है और दूसरे ने दाढ़ी रखी है। इस वीडियो को लेकर व्यापक आक्रोश जताया गया और इसकी निंदा हुई थी। हिंसा और सांप्रदायिक नफरत भड़काने के आरोपों के बाद भाजपा ने पोस्ट को हटा लिया था।
