दिल्ली वायु प्रदूषण के मामले पर सुप्रीम कोर्ट से वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) को जमकर फटकार लगी है। सुप्रीम कोर्ट ने समिति से कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किए जाने की आवश्यकता है कि पराली जलाने के वैकल्पिक उपकरणों का उपयोग जमीनी स्तर पर किया जाए।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीएक्यूएम ने कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन उसे और अधिक सक्रिय होने की आवश्यकता है और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके प्रयास और निर्देश वास्तव में प्रदूषण की समस्या को कम करने में कारगर हों।
सुप्रीम कोर्ट
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क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने
जस्टिस अभय एस ओका और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने यह देखकर आश्चर्य व्यक्त किया कि सीएक्यूएम ने सीएक्यूएम अधिनियम की धारा 14 के अनुसार उन लोगों के खिलाफ कभी भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की है जो इसके निर्देशों का उल्लंघन करते हुए पराली जलाने में लिप्त हैं। न्यायमूर्ति ओका ने मौखिक रूप से कहा कि यदि धारा 14 के तहत कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाती है, तो खेतों में आग लगाने के खिलाफ निषेधात्मक निर्देश केवल कागजों पर ही रह जाएंगे।
3 अक्टूबर को अगली सुनवाई
शीर्ष अदालत ने इसी के साथ प्रदूषण को नियंत्रित करने और पराली जलाने से रोकने के लिए उठाए गए कदमों को लेकर आयोग को बेहतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया इस मामले की अगली सुनवाई गुरुवार, 3 अक्टूबर को होगी। सुनवाई के दौरान सीएक्यूएम के चेयरमैन राजेश वर्मा वर्चुअली मौजूद रहे। उन्होंने पीठ को बताया कि उन्होंने दो सप्ताह पहले ही कार्यभार संभाला है। उन्होंने यह भी बताया कि आयोग ने पंजाब और हरियाणा के उन जिलों के उपायुक्तों के साथ बैठक की है, जहां पराली जलाने की घटनाएं सामने आई हैं।
