जजों की नियुक्ति और कॉलेजियम में पारदर्शिता की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज

मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति किसी सामान्य पदोन्नति या आवेदन की प्रक्रिया नहीं है। CJI गवई ने कहा, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में नियुक्ति निमंत्रण के आधार पर होती है। यह ऐसा पद नहीं है, जिसके लिए व्यक्ति आवेदन करे जैसे कि न्यायिक मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (JMFC) के लिए होता है।

Supreme Court News: गैर-सरकारी संगठन जनश्रुति ने सर्वोच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रणाली में सुधार की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया कि वर्तमान कॉलेजियम प्रणाली असंवैधानिक है क्योंकि यह न तो संविधान में उल्लिखित है और न ही किसी विधि द्वारा समर्थित। संगठन का कहना था कि कॉलेजियम प्रक्रिया पारदर्शिता, जवाबदेही और विविधता से रहित है, जिसके कारण इसमें पक्षपात और मनमानी के आरोप लगते रहे हैं।

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जजों की नियुक्ति और कॉलेजियम में पारदर्शिता की मांग वाली याचिका SC से खारिज (PTI)

'परामर्श शब्द का प्रयोग, सहमति का नहीं...'

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 124 और 217 में परामर्श शब्द का प्रयोग किया गया है, सहमति का नहीं। जिसका अर्थ यह है कि न्यायिक नियुक्तियों में सर्वोच्च न्यायालय को पूर्ण अधिकार नहीं दिया गया था, बल्कि यह एक परामर्श आधारित प्रक्रिया होनी चाहिए थी। जनश्रुति की तरफ से सीनियर एडवोकेट डाक्टर शशि किरण, एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड साधना संधू और निखिल कुमार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने दलीलें रखीं।

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