Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने PMLA यानी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट से जुड़े 2022 के अहम फैसले के खिलाफ लंबित रिव्यू पिटीशनों की सुनवाई के लिए बेंच का पुनर्गठन किया है। अब मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच करेगी। इसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो-PTI)
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पहले कौन सी बेंच कर रही थी सुनवाई?
इससे पहले मामला CJI सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की बेंच के सामने था। CJI ने कहा कि पुरानी बेंच के जरिए सुनवाई जारी रखने के लिए तीन मौजूदा बेंचों का पुनर्गठन करना पड़ेगा। सभी पक्षों की सहमति के बाद नई बेंच का गठन किया गया।
2022 के फैसले में क्या हुआ था?
27 जुलाई 2022 को जस्टिस ए.एम. खानविलकर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने PMLA की कई महत्वपूर्ण धाराओं की संवैधानिक वैधता बरकरार रखी थी। फैसले में ED की गिरफ्तारी, तलाशी, जब्ती और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी संपत्तियों को अटैच करने की शक्तियों को बरकरार रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट PMLA के 2022 के फैसले के खिलाफ लंबित रिव्यू में मुख्य रूप से ECIR की कॉपी आरोपी को दिए जाने और धारा 24 के तहत सबूत का भार आरोपी पर डालने के प्रावधान की समीक्षा करेगा।
इसी फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दाखिल की गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही कुछ सीमित मुद्दों पर फैसले की समीक्षा करने की अनुमति दी थी। अब इन लंबित रिव्यू पिटीशनों पर नई बेंच सुनवाई करेगी।
क्या है PMLA एक्ट?
PMLA यानी 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' भारत का एक प्रमुख कानून है, जिसे अवैध रूप से कमाए गए काले धन को वैध (सफेद) बनाने की प्रक्रिया यानी मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने के लिए वर्ष 2002 में बनाया गया था और इसे 2005 में लागू किया गया।
इस कानून का मुख्य उद्देश्य अवैध धन के लेन-देन को रोकना, वित्तीय अपराधों पर अंकुश लगाना और अपराध के माध्यम से हासिल की गई संपत्तियों को जब्त करना है। देश में इस कानून के तहत मामलों की जांच और कार्रवाई करने की मुख्य जिम्मेदारी प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पास होती है।
PMLA की सबसे बड़ी विशेषता इसके सख्त प्रावधान हैं, जैसे कि जांच अधिकारी द्वारा संदिग्ध संपत्तियों को कुर्क करने का अधिकार और जमानत से जुड़े कड़े नियम, जिनमें आरोपी को खुद को निर्दोष साबित करना पड़ता है। यह कानून सीधे लागू न होकर केवल उन्हीं मामलों में जुड़ता है, जहां पहले से भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी या तस्करी जैसे किसी मूल अपराध की FIR दर्ज हो।
