Navneet Kaur Rana: लोकसभा चुनाव से पहले अमरावती से सिटिंग सांसद और बीजेपी प्रत्याशी नवनीत राणा को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया है, जिसमें उनके अनुसूचति जाति प्रमाण पत्र को जाली बताते हुए रद्द कर दिया गया था, साथ ही उन पर दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद नवनीत राणा की लोकसभा सदस्यता भी खतरे में आ गई थी।
नवनीत राणा
नवनीत राणा ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। गुरुवार को इस मामले में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने उनकी याचिका को विचारार्थ स्वीकार कर लिया, जिसमें उन्होंने जाति प्रमाणपत्र को रद्द करने के बंबई उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी थी। साथ ही उनके प्रमाण पत्र को भी सही माना है।
कास्ट स्क्रूटनी कमेटी के फैसले को माना सही
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कास्ट स्क्रूटनी कमेटी के फैसले को सही माना है साथ ही कहा कि बॉम्बे उच्च न्यायालय को इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए था। बता दें, बॉम्बे हाईकोर्ट ने 8 जून 2021 को कहा था कि नवनीत ने मोची जाति का प्रमाण पत्र फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके धोखाधड़ी से हासिल किया था। हाईकोर्ट ने उन पर 2 लाख रुपए जुर्माना भी लगाया था।
28 फरवरी को फैसला रखा था सुरक्षित
इस मामले में जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस संजय करोल की बेंच ने 28 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब जब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया है, ऐसे में नवनीत राणा के जाति प्रमाण पत्र को भी हरी झंडी मिल गई है। बता दें, नवनीत राणा फिलहाल निर्दलीय सांसद के तौर पर महाराष्ट्र के अमरावती निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है।
असत्य पर सत्य की जीत
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नवनीत राणा ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा असत्य पर सत्य की जीत हुई है।
