क्या है गुरु शिष्य परंपरा? जब सुधांशु त्रिवेदी ने दुनिया को समझाया ऋषि-मुनियों की शिक्षा पद्धति का मतलब

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Nov 4, 2023, 11:35 PM IST

Sudhanshu Trivedi: 'गु' का अर्थ होता है अंधकार और 'रू'का अर्थ है निवारण। जो अंधकार का निवारण कर दे वही गुरू है। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, हमारे यहां कहा जाता है कि किस गुरू से दीक्षा ली? उन्होंने कहा, शिक्षा लेने के लिए गुरू की आवश्यकता नहीं है।

Sudhanshu Trivedi: भारतीय संस्कृति में गुरु का बहुत महत्व है। कहीं गुरु को 'ब्रह्मा-विष्णु-महेश' कहा गया है तो कहीं 'गोविन्द'। गुरु-शिष्य परम्परा के अन्तर्गत गुरु (शिक्षक) अपने शिष्य को शिक्षा देता है या कोई विद्या सिखाता है। बाद में वही शिष्य गुरु के रूप में दूसरों को शिक्षा देता है। यही क्रम चलता जाता है। यह परम्परा सनातन धर्म की सभी धाराओं में मिलती है।

Sudhanshu Trivedi

सुधांशु त्रिवेदी

भाजपा नेता व प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने दिल्ली विश्वविद्यालय में गुरू-शिष्य की परम्परा को लेकर एक व्याख्यान दिया था। इसमें उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का एक मात्र देश है, जो खुद को भारत माता कहता है और जब पुल्लिंग की बात होती है जगतगुरू थे। उन्होंने कहा, भारत में गुरू और शिष्य परंपरा थी।

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