1947 का असली तारा सिंह: लड़ते-लड़ते गई थी 200 सिखों की जान, कुएं में कूदीं 93 महिलाएं, लेकिन नहीं किया धर्म परिवर्तन

  • Authored by: अमित कुमार मंडल
  • Updated Jun 13, 2023, 01:28 PM IST

1947 भारत-पाक विभाजन के दौरान पाकिस्तान के एक गांव में सिखों ने मरते दम तक बहादुरी से मुस्लिम हमलावरों का मुकाबला किया था। इस दौरान जब 93 महिलाओं के सामने बचने का कोई रास्ता नहीं रहा तो उन्होंने कुएं में कूदकर जान दे दी थी।

Master Tara Singh: 1947 भारत-पाकिस्तान विभाजन की यादें अभी तक हमारे जेहन में ताजा हैं। विभाजन के दौर में जो मार-काट मची थी, दंगा हुआ था उसके बारे में जानकर आज भी लोग सिहर उठते हैं। उस दौर में जुल्म के साथ दिलेरी के वाकये भी सामने आए थे। धोखा और वादाखिलाफी की ऐसी ही एक कहानी हम आपको बता रहे हैं जब पाकिस्तानियों ने सिखों पर बेइंतहा जुल्म ढाए थे। सिखों ने मरते दम तक बहादुरी से मुकाबला किया था। लेकिन जब महिलाओं के सामने बचने का कोई रास्ता नहीं बचा तो उन्होंने कुएं में कूदकर जान दे दी थी।

Sikh Killed in Pakistan during 1947

1947 में थोहा खालसा में सिखों का कत्लेआम (Credit: Twitter@ImtiazMahmood)

तारा सिंह ने की अगुवाई

आज जब सनी देओल की फिल्म गदर-2 रिलीज होने को तैयार है, ऐसे में इस कहानी का जिक्र करना गलत नहीं होगा। गदर एक काल्पनिक कहानी है जिसका प्रमुख किरदार है तारा सिंह। लेकिन हम आपको जो असली कहानी बताने जा रहे हैं उसके मुख्य किरदार का नाम भी मास्टर तारा सिंह ही है। ये असली तारा सिंह फिल्मी तारा सिंह से अलग है। उसने मरते दम तक अपने समुदाय को बचाने की हर मुमकिन कोशिश की थी।

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