लद्दाख में गिरफ्तार किए गए पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राजस्थान के जोधपुर जेल में शिफ्ट कर दिया गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बख्तरबंद गाड़ियों में सोनम वांगचुक को लेकर पुलिस जोधपुर पहुंची। वांगचुक को आज ही लद्दाख में पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
सोनम वांगचुक को जोधपुर जेल किया गया शिफ्ट (फोटो-PTI & Times Now Navbharat)
सोनम वांगचुक जोधपुर जेल शिफ्ट
रिपोर्ट्स के अनुसार वांगचुक को जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन लाया गया, वहां से सीधे जोधपुर जेल भेज दिया गया। जोधपुर पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश खुद इन गाड़ियो के साथ जोधपुर जेल पहुंचे। हालांकि वांगचुंग की शिफ्टिंग को लेकर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
आज ही हुई है गिरफ्तारी
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शुक्रवार को कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है। यह कार्रवाई लद्दाख को राज्य का दर्जा और संवैधानिक संरक्षण देने की मांग पर हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के दो दिन बाद हुई है, जिसमें केंद्र शासित प्रदेश में चार लोगों की मौत हो गई थी और 90 घायल हुए थे। पुलिस ने वांगचुक को लद्दाख से बाहर भेज दिया, जबकि लद्दाख प्रशासन ने एहतियाती कदम के तौर पर लेह जिले के अधिकार क्षेत्र में सभी मोबाइल इंटरनेट कनेक्शन काट दिए हैं।
लेह में कर्फ्यू
इस बीच हिमालयी क्षेत्र में असहज शांति का माहौल है। लेह में लगातार तीसरे दिन भी कर्फ्यू लागू रहा और केंद्र शासित प्रदेश में कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है। बुधवार शाम को व्यापक हिंसा के बाद कर्फ्यू लगाया गया था। इससे पहले राज्य के दर्जे और संविधान की छठी अनुसूची को लद्दाख में विस्तारित करने की मांग पर केंद्र के साथ बातचीत आगे बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई और इस दौरान चार लोगों की मौत हो गई। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि "पूरे लद्दाख में सुरक्षा स्थिति शांतिपूर्ण है। लोगों को आवश्यक वस्तुएं खरीदने की अनुमति देने के लिए दिन में बाद में प्रतिबंधों में ढील दी जा सकती है।" झड़पों के बाद 50 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है जबकि करगिल सहित केंद्र शासित प्रदेश के अन्य प्रमुख कस्बों में भी पांच या अधिक व्यक्तियों के इकट्ठा होने पर प्रतिबंध लगाने वाले निषेधाज्ञा आदेश लागू रहे। स्थिति की समीक्षा करने के लिए गृह मंत्रालय (एमएचए) की एक उच्च-स्तरीय टीम लेह पहुंच चुकी है।रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों ने पानी की बौछार या चेतावनी देने के लिए गोलियां चलाने जैसे अन्य तरीकों का उपयोग किए बिना प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलीबारी की।
