Sonam Wangchuk Letter: 'मैं भी जीना चाहता हूं, लेकिन....'; सोनम वांगचुक ने नड्डा और जितेंद्र सिंह को लिखी चिट्ठी, रखी ये शर्त

सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कहा है कि वह भी जीना चाहते हैं, वह अपने छात्रों, शिक्षा और अपने काम पर लौटना चाहते हैं, लेकिन उन युवाओं के हितों से समझौता करके ऐसा नहीं कर सकते जिनके लिए यह आंदोलन शुरू किया गया था।

नई दिल्ली: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहे पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने अपना अनशन खत्म करने के एवज में सकार के सामने कुछ शर्ते रखी हैं। उन्होंने कहा है कि अगर सरकार आंदोलन में शामिल युवाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं करने का स्पष्ट आश्वासन देती है तो वह अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त कर देंगे। उन्होंने कहा कि मैं भी जीना चाहता हूं, लेकिन मैं उन छात्रों के हितों से समझौता नहीं कर सकता।

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सोनम वांगचुक ने लिखा नड्डा और जितेंद्र सिंह को पत्र। (फोटो- ani/pti)

पत्र में वांगचुक ने अस्पताल में उनसे मुलाकात करने और अनशन समाप्त करने की अपील करने के लिए दोनों केंद्रीय मंत्रियों का आभार भी जताया है। उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान सरकार ने परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को पर्याप्त मुआवजा देने और इस पूरे मामले पर संसद में सार्थक चर्चा कराने, जिसमें शिक्षा मंत्री की जवाबदेही और इस्तीफे पर विचार भी शामिल हो, का सकारात्मक आश्वासन दिया है।

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