नई दिल्ली: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहे पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने अपना अनशन खत्म करने के एवज में सकार के सामने कुछ शर्ते रखी हैं। उन्होंने कहा है कि अगर सरकार आंदोलन में शामिल युवाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं करने का स्पष्ट आश्वासन देती है तो वह अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त कर देंगे। उन्होंने कहा कि मैं भी जीना चाहता हूं, लेकिन मैं उन छात्रों के हितों से समझौता नहीं कर सकता।
सोनम वांगचुक ने लिखा नड्डा और जितेंद्र सिंह को पत्र। (फोटो- ani/pti)
पत्र में वांगचुक ने अस्पताल में उनसे मुलाकात करने और अनशन समाप्त करने की अपील करने के लिए दोनों केंद्रीय मंत्रियों का आभार भी जताया है। उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान सरकार ने परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को पर्याप्त मुआवजा देने और इस पूरे मामले पर संसद में सार्थक चर्चा कराने, जिसमें शिक्षा मंत्री की जवाबदेही और इस्तीफे पर विचार भी शामिल हो, का सकारात्मक आश्वासन दिया है।
'चलो संसद' मार्च का किया जिक्र
सोनम वांगचुक ने अपने पत्र में 20 जुलाई को आयोजित 'चलो संसद'मार्च का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था,लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने अत्यधिक बल प्रयोग किया। उन्होंने लिखा कि देश और दुनिया ने प्रदर्शनकारियों के धैर्य और लोकतांत्रिक तरीके से किए गए विरोध को देखा है। ऐसे में उनकी उम्मीद है कि आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई, उत्पीड़न या बदले की भावना से कदम नहीं उठाया जाएगा।
65 सांसदों के समर्थन का दावा
वांगचुक ने अपनी चिट्ठी में दावा किया है कि केंद्रीय मंत्रियों की मुलाकात के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसदों ने सरकार को पत्र लिखकर उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी दी गई है कि सरकार इस मुद्दे पर जल्द फैसला ले सकती है और वह पूरे देश की तरह उस निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।युवाओं पर कार्रवाई नहीं करने का मांगा आश्वासन
पत्र में उन्होंने कहा कि वह अपने छात्रों, शिक्षा और अपने काम पर लौटना चाहते हैं, लेकिन उन युवाओं के हितों से समझौता करके ऐसा नहीं कर सकते जिनके लिए यह आंदोलन शुरू किया गया था। उन्होंने सरकार से स्पष्ट आश्वासन देने की मांग की कि आंदोलन में भाग लेने वाले किसी भी युवा के खिलाफ दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने लिखा कि इन युवाओं का अपराध केवल निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था की मांग करना है।
आश्वासन नहीं मिला तो जारी रहेगा अनशन
इसके साथ ही सोनम वांगचुक ने यह भी कहा कि अगर सरकार उनकी इस मांग पर स्पष्ट भरोसा देती है तो वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे। लेकिन, अगर ऐसा नहीं हुआ तो वह अपना अनिश्चितकालीन उपवास जारी रखेंगे। साथ ही उन्होंने सरकार से आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस बल का और अधिक इस्तेमाल नहीं करने की भी अपील की।
पत्र के अंत में वांगचुक ने लिखा कि लोकतंत्र की मजबूती इस बात से तय होती है कि वह असहमति जताने वाले युवाओं के साथ कैसा व्यवहार करता है, न कि केवल अपने समर्थकों के साथ।
मेदांता अस्पताल ने जारी किया सोनम वांगचुक का हेल्थ अपडेट
बता दें कि सोनम वांगचुक का इलाज मेदांता अस्पताल में चल रहा है। इस बीच, मेदांता के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ.संजय दुरानी ने उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सोनम वांगचुक की स्थिति फिलहाल स्थिर है। वे पूरी तरह होश में हैं, उनके सभी वाइटल पैरामीटर्स सामान्य सीमा के भीतर हैं। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि उन्हें दिया जा रहा सभी इलाज उनकी पूर्ण सहमति (informed consent)के साथ किया जा रहा है।
