Maharashtra Politics: उद्धव गुट के बागी सभी छह सांसद 21 जून को शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। सांसदों के एनडीए में शामिल होने का कार्यक्रम दिल्ली या मुंबई में आयोजित हो सकता है। इसके पहले सूत्रों ने बागी सांसदों के 19 जून को यानी शुक्रवार को एनडीए में शामिल होने की उम्मीद जताई थी। शिवसेना का आज 60वां स्थापना दिवस भी है। इस मौके पर शिवसेना का शाम को एक बड़ा कार्यक्रम होना है। सूत्रों का कहना है कि महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी का 'ऑपरेशन टाइगर' लगभग पूरा हो चुका है। अटकलें यह भी लग रही हैं कि सांसदों के बाद अब उद्धव गुट के विधायकों में भी टूट हो सकती है।
महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा सियासी उलटफेर। तस्वीर-AI
शिवसेना का स्थापना दिवस मनाएंगे दोनों गुट
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उबाठा) और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री शिंदे के नेतृत्व वाला गुट, दोनों ही शुक्रवार को अविभाजित शिवसेना का स्थापना दिवस मनाएंगे। दरअसल, गुरुवार को उद्धव गुट ने व्हिप जारी कर अपने सभी सांसदों की बैठक बुलाई थी लेकिन बैठक में छह सांसद नहीं पहुंचे। सांसदों के बागी होने पर राज्यसभा सांसद संजय राउत ने तीखा हमला बोला। राउत और महाराष्ट्र सरकार में भाजपा मंत्री गिरीश महाजन के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली।
राउत का दावा-सांसदों को 10-10 करोड़ रुपये और दिए गए
राउत ने दावा किया कि उनकी पार्टी के बागी सांसदों को 10-10 करोड़ रुपये और दिए गए हैं और उन्हें राजस्थान में एक सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है। राउत ने नई दिल्ली में संवाददाता सम्मेलन में शिवसेना (उबाठा) के बागी सांसदों का संदर्भ देते हुए कहा कि 'गद्दारों’ को पुलिस सुरक्षा दी गई है। उन्होंने मांग की कि सांसदों को दी गई सुरक्षा वापस ली जाए। वहीं, महाराष्ट्र पुलिस ने बृहस्पतिवार को कहा कि शिवसेना (उबाठा) के बागी छह सांसदों को ’वाई-प्लस’ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है। राउत ने चेतावनी दी कि पार्टी बागी सांसदों के खिलाफ ’ऑपरेशन तुड़वा’ शुरू करेगी।
'50 करोड़ रुपये की पेशकश की जा रही है'
उन्होंने कहा, 'शिवसेना (उबाठा) के बागी सांसदों को अतिरिक्त 10-10 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इससे पहले उन्हें 15-15 करोड़ रुपये दिये गये थे। वे दिल्ली से राजस्थान में एक सुरक्षित स्थान पर चले गए हैं।’राज्यसभा सदस्य ने बृहस्पतिवार को संवाददाता सम्मेलन में फिर से अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने पहले आरोप लगाया था कि सांसदों को पाला बदलने के लिए 50 करोड़ रुपये की पेशकश की जा रही है। राउत ने मांग की कि बागी सांसद इस्तीफा दें और दोबारा चुनाव लड़कर जनादेश हासिल करें। उन्होंने कहा कि शिवसेना (उबाठा) के कार्यकर्ताओं ने उनकी जीत सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत की है।
संसदीय दल की बैठक में शामिल नहीं हुए बागी सांसद
उन्होंने कहा, 'यदि उनमें थोड़ी भी नैतिकता बची है, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।’ इससे पहले दिन में शिवसेना (उबाठा) के नौ लोकसभा सदस्यों में से छह बृहस्पतिवार को नई दिल्ली में हुई उसके संसदीय दल की बैठक में शामिल नहीं हुए जिससे पार्टी में विभाजन के संकेत स्पष्ट हो गए और अनुपस्थित सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की संभावना प्रबल हो गई। शिवसेना (उबाठा) के सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे बैठक में शामिल हुए। पार्टी के एकमात्र राज्यसभा सदस्य संजय राउत भी बैठक में मौजूद थे। शेष छह सांसदों की गैर मौजूदगी ने पार्टी के संसदीय दल में विभाजन की लगभग पुष्टि कर दी।
बैठक में शामिल नहीं होने वाले सांसद नागेश आष्टीकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे हैं।
बीएमसी में भी उद्धव को लग सकता है झटका
उधर, महाजन ने दावा किया कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में शिवसेना (उबाठा) के पार्षद भी जल्द पार्टी छोड़ देंगे। उन्होंने पार्टी में हो रही टूट और नेताओं के बाहर जाने के लिए राउत को जिम्मेदार ठहराया। महाजन ने शिवसेना (उबाठा) के लोकसभा सांसदों के संभावित दल-बदल पर राउत की टिप्पणी को लेकर उन पर हमला बोला। जवाब में राउत ने कहा कि अगर केंद्रीय जांच एजेंसियों पर उनका नियंत्रण होता तो सबसे पहले महाजन ही अपनी पार्टी छोड़ देते।
