Ujjain Shivling Discovery: मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर से एक खास खबर सामने आई है। यहां महाकालेश्वर मंदिर परिसर के पास खुदाई के दौरान एक बड़ा प्राचीन शिवलिंग मिला है। यह खोज उस समय हुई जब सिंहस्थ 2028 मेले (Simhastha 2028 Preparation) की तैयारियों के तहत मंदिर के विस्तार का काम चल रहा था। जानकारी के अनुसार, मंदिर के आसपास जमीन को समतल करने और निर्माण कार्य के लिए भारी मशीनों से खुदाई की जा रही थी। इसी दौरान मजदूरों और अधिकारियों को जमीन के अंदर एक बड़ा प्राचीन शिवलिंग दिखाई दिया। जैसे ही इसकी जानकारी फैली, वहां लोगों की भीड़ जुटने लगी और इलाके में उत्साह का माहौल बन गया।
महाकाल मंदिर के पास खुदाई में मिला शिवलिंग
दर्शन के लिए जुटने लगी भक्तों की भीड़
महाकाल मंदिर के सामने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए गेट नंबर-4 के पास टनल और वेटिंग हॉल का निर्माण कार्य चल रहा है। शुक्रवार सुबह करीब 4 बजे खुदाई के दौरान पोकलेन मशीन ऑपरेटर को मिट्टी के बीच एक शिवलिंग दिखाई दिया। इसके बाद तुरंत साइड इंजीनियर और मंदिर प्रशासन को सूचना दी गई। घटना के बाद एहतियातन खुदाई का काम रोक दिया गया। मंदिर के पुजारियों ओर क्षेत्रवासियों ने मौके पर पहुंचकर शिवलिंग का पूजन-अर्चन किया और फिलहाल उसे उसी स्थान पर सुरक्षित रखवाया गया है। खबर फैलते ही श्रद्धालुओं की भीड़ मौके पर जुटने लगी और दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया। संभवत परमार कालीन शिवलिंग इसे बताया जा रहा है।
साइट इंजीनियर दीपक पटेल के मुताबिक, खुदाई के दौरान शिवलिंग के साथ अन्य प्राचीन अवशेष मिलने के संकेत भी हैं। उन्होंने बताया कि नंदी की प्रतिमा जैसे अवशेष भी हो सकते हैं, जिसकी जांच की जा रही है। गौरतलब है कि मई 2020 में भी महाकाल मंदिर विस्तार कार्य के दौरान खुदाई में एक प्राचीन मंदिर के अवशेष मिले थे। उस समय 25-30 फीट नीचे खुदाई में शिवलिंग, नंदी, गणेश, मां चामुंडा और अन्य मूर्तियां मिली थीं। पुरातत्व विशेषज्ञों ने इन्हें करीब एक हजार वर्ष पुराना, परमारकालीन बताया था। 7 मीटर गहराई से निकले शिवलिंग की जांच अब पुरातत्व विभाग के द्वारा की जाएगी।
महाकालेश्वर मंदिर देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक
उज्जैन को भगवान शिव की नगरी माना जाता है और यहां स्थित महाकालेश्वर मंदिर देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक है। ऐसे में खुदाई के दौरान प्राचीन शिवलिंग का मिलना लोगों के लिए आस्था और श्रद्धा का विषय बन गया है। कई श्रद्धालु इसे एक शुभ संकेत के रूप में देख रहे हैं। फिलहाल, प्रशासन और पुरातत्व विभाग इस प्राचीन शिवलिंग की जांच कर रहे हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह कितने समय पुराना है और इसका ऐतिहासिक महत्व क्या हो सकता है। अगर यह प्राचीन काल का साबित होता है, तो यह उज्जैन के इतिहास और धार्मिक महत्व को और मजबूत कर सकता है।
यह खोज उज्जैन के लिए काफी खास
अधिकारियों का कहना है कि निर्माण कार्य को कुछ समय के लिए रोका गया है, ताकि इस स्थान की ठीक से जांच की जा सके। साथ ही, सुरक्षा के भी पूरे इंतजाम किए जा रहे हैं, ताकि किसी तरह की क्षति न हो। कुल मिलाकर अगर कहा जाए तो यह खोज उज्जैन के लिए काफी खास मानी जा रही है। इससे न सिर्फ धार्मिक आस्था जुड़ी है, बल्कि यह शहर के इतिहास से भी एक नई कड़ी जोड़ सकती है। पुरातत्व विभाग के डॉ रमन सोलंकी प्रथम दृष्टया यह शिवलिंग राजा भोज के काल का परमारकालीन बताया जा रहा है। शिवलिंग की धुलाई के बाद ही इसके काल का पता चल सकेगा।
