Shivsena UBT : शिवसेना (यूबीटी) ने पार्टी के बागी 6 सांसदों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शिवसेना (यूबीटी) ने एकनाथ शिंदे की शिवसेना में विलय को मंजूरी देने वाले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वकील देवदत्त कामत ने CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने मामले की जल्द सुनवाई की मांग की है।
शिंदे गुट में शामिल हुए हैं शिवसेना यूबीटी के 6 सांसद।
शिवसेना (UBT) के सांसदों की संख्या घटकर हुई 3
कामत ने कहा कि संसद में एक राजनीतिक दल के रूप में हमारा कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। ये 6 सांसद अब हमारे साथ नहीं हैं। लोकसभा अध्यक्ष ने उनके दूसरी पार्टी में विलय को मान्यता दे दी है। कामत की इस मांग पर चीफ जस्टिस ने जल्द सुनवाई का भरोसा दिया है। संसद के मानसून सत्र से पहले लोकसभा अध्यक्ष ने शिवसेना (UBT) के 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में विलय को मंजूरी दे दी थी। इसके बाद लोकसभा में शिवसेना (UBT) के सांसदों की संख्या घटकर सिर्फ 3 रह गई है।
बागी सांसद एक अलग गुट बना सकते थे-दानवे
इससे पहले यूबीटी नेता अंबादास दानवे ने शनिवार को कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा पार्टी के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना गुट में विलय को मंजूरी देने का फैसला गैर-कानूनी है और पार्टी इसे अदालत में चुनौती दी जाएगी। दानवे ने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार, एक पार्टी का दूसरी पार्टी में विलय हो सकता है, लेकिन विधायकों या सांसदों का कोई समूह अपने स्तर पर ऐसा नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि शिवसेना (उबाठा) के बागी सांसद एक अलग गुट बना सकते थे।
दल-बदल विरोधी कानून का उल्लंघन नहीं हुआ -निरुपम
पूर्व सांसद और शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के सदस्य संजय निरुपम ने कहा कि विलय से दल-बदल विरोधी कानून का उल्लंघन नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा, 'सभी छह सांसदों ने दल-बदल विरोधी कानून के तहत पूरी तरह से संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए (उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट से) अलग होने का फैसला किया। इसी के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ने इस विलय को मंजूरी दी है। हम इस फैसले का स्वागत करते हैं।'
लोग सीरियल किलर और बलात्कारी हैं-संजय राउत
वहीं, संजय राउत ने रविवार को कहा कि यह कदम लोकतंत्र का 'बलात्कार और हत्या’ करने जैसा है। राउत ने बिना किसी का नाम लिए कहा, 'शिवसेना (उबाठा) के 'जलती हुई मशाल’ चुनाव चिह्न पर चुने गए सांसदों को खरीद लिया गया। यह लोकतंत्र का बलात्कार और हत्या है और यह एक गंभीर अपराध है। ये लोग सीरियल किलर और बलात्कारी हैं।’ राउत ने सवाल किया कि जब संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत किसी गुट के अलग होने या विलय की इजाजत नहीं है, तो लोकसभा अध्यक्ष ने इसकी अनुमति कैसे दी।
