छात्रों के प्रदर्शनों पर सख्ती नहीं, संवाद की जरूरत: सुप्रीम कोर्ट, CJI बोले- युवाओं को सुनना सबसे बड़ी ताकत

सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान अभद्र भाषा और गाली-गलौज करने वाले युवाओं को सात दिन की 'कम्युनिटी सर्विस' देने और प्रदर्शन के आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली याचिका को अन्य लंबित मामलों के साथ टैग कर दिया है।

Supreme Court News: दिल्ली में हुए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अहम टिप्पणी की। अर्जी पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि 'लोकतंत्र में इस तरह के शांतिपूर्ण मार्च और प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों को भी संयम बरतना चाहिए।' अदालत ने कहा कि अधिकारियों को बेहद सावधानी से कदम उठाने की जरूरत है, ताकि युवा हिंसा का रास्ता न अपनाएं। शीर्ष अदालत ने इस याचिका को अन्य लंबित मामलों के साथ टैग कर दिया।

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सीजेपी प्रदर्शन के खिलाफ अर्जी पर एससी में हुई सुनवाई।

सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान अभद्र भाषा और गाली-गलौज करने वाले युवाओं को सात दिन की 'कम्युनिटी सर्विस' देने और प्रदर्शन के आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली याचिका को अन्य लंबित मामलों के साथ टैग कर दिया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण मार्च और प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों और प्रशासन को भी संयम बरतना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अधिकारियों को बेहद सावधानी से कदम उठाने की जरूरत है, ताकि युवा हिंसा का रास्ता न अपनाएं। अदालत ने टिप्पणी की, 'ये युवा हैं। इन्हें सलाह और काउंसलिंग की जरूरत है।'

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