अभी कुछ ऐसी है देश में महिलाओं की सियासी तस्वीर, 33% आरक्षण से बदलेगी सूरत

  • Written by: आलोक कुमार राव
  • Updated Sep 21, 2023, 05:05 PM IST

Women Reservation Bill : महिला आरक्षण विधेयक राज्यसभा और राज्यों की विधानसभा परिषदों में लागू नहीं होगा। मौजूदा समय में भारत के 95 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में लगभग आधी महिलाएं हैं, लेकिन संसद में इनकी भागीदारी की बात करें तो निम्न सदन में महिला सदस्य केवल 15 प्रतिशत हैं जबकि विधानसभाओं में यह आंकड़ा और कम 10 प्रतिशत है।

Women Reservation Bill : देश की राजनीति में महिला की हिस्सेदारी बढ़ाने की बात दशकों पहले से होती आ रही है। सियासत में आधी आबादी की हिस्सेदारी बढ़ाए जाने के लिए समय-समय पर गंभीर चर्चाएं एवं राजनीतिक पहल भी हुई। लेकिन यह पहल कभी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पाई। लेकिन अब यह मुहिम अपने रंग दिखा रही है। लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने के लिए लाया गया महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा में पारित हो चुका है और विपक्षी दलों के रवैये को देखते हुए इसका राज्यसभा से पारित होना तय है। जाहिर है कि कानून बन जाने के बाद राजनीति में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ेगी। राजनीतिक रूप से उनका सशक्तिकरण होगा।

Women Reservation Bill

राजनीति में बढ़ेगी महिलाओं की हिस्सेदारी।

कई राज्यों में नुमाइंदगी शू्न्य है

अब तक देश में महिलाओं की राजनीति में हिस्सेदारी कमजोर रही है। भारत में कई राज्य (खासकर पूर्वोत्तर) के ऐसे भी हैं जहां उनकी नुमाइंदगी बिल्कुल शून्य है। लेकिन अब सरकार के इस पहल से देश की आधी आबादी को उनका वाजिब हक मिलेगा। महिला आरक्षण विधेयक को संसद में पारित कराने के लिए सरकार की तरफ से यह 7वां प्रस्ताव है। महिलाओं को विधायिका में आरक्षण देने के लिए पहली बार 1996 में विधेयक पेश किया गया था। हालांकि, तत्कालीन सरकार विधेयक पारित कराने के लिए जरूरी आंकड़ा जुटा नहीं पाई।

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