CJI Resignation Row: भारतीय राजनीति और न्यायपालिका के गलियारों में इस समय हलचल तेज हो गई है। एक तरफ जहां मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष ने एकजुट होकर मोर्चा खोल दिया है, वहीं दूसरी तरफ मुख्य न्यायाधीश (CJI) को लेकर की गई एक टिप्पणी पर नया कानूनी और राजनीतिक बवंडर खड़ा हो गया है।
केरल कांग्रेस के विवादित ट्वीट से मचा बवाल (फाइल फोटो)
यह मामला तब और अधिक तूल पकड़ गया जब कांग्रेस की केरल इकाई ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से इस्तीफे की मांग कर दी। यद्यपि विवाद बढ़ता देख इस पोस्ट को तुरंत हटा दिया गया, लेकिन तब तक इस मुद्दे ने सियासी रंग ले लिया था।
वहीं, सत्तापक्ष ने इस मुद्दे पर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया है। बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि कांग्रेस की सोच अब वामपंथियों और चरमपंथियों जैसी हो गई है तथा वह देश में अराजकता का माहौल बनाना चाहती है।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी कहा कि कांग्रेस का अगला निशाना देश की न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाएं हैं। वहीं समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी निराशा व्यक्त की है। कुल मिलाकर, कानूनी याचिका से शुरू हुआ यह घटनाक्रम अब संस्थागत गरिमा बनाम राजनीतिक घमासान का केंद्र बन चुका है।
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बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेसवार्ता कर कहा - "देश को अराजकता की आग में झोंकने के लिए किसी भी हद तक गिरने को तैयार राहुल गांधी और उनके साथियों के द्वारा आज दिल्ली में सर्वोच्च न्यायालय में जिस प्रकार का अशोभनीय दृश्य दिखाया गया, इसकी भारत के इतिहास में कोई मिसाल नहीं है। इस प्रकार हुजूम लेकर न्यायालय को प्रभावित करना, आतंकित करना, मुझे लगता है कि आज तक कोई नेता प्रतिपक्ष ऐसा नहीं रहा होगा। और उतरकर दूसरी तरफ भागकर, अपने सिक्योरिटी गार्ड्स को ब्रेक करते हुए दूसरे गेट से अंदर जाने का प्रयास, यह दर्शाता है कि या तो वह मानसिक संतुलन खो चुके हैं या संदिग्ध शक्तियों के द्वारा इस सीमा तक संचालित हैं कि वह किसी भी हद तक नीचे गिरने को तैयार हैं, ताकि भारत की सड़कों पर अव्यवस्था दिख सके।"
भाजपा प्रवक्ता ने आगे कहा- "आज ही कांग्रेस-मुस्लिम लीग गठबंधन की केरल सरकार, कांग्रेस की केरल इकाई के द्वारा X पर एक अत्यंत निम्न पोस्ट किया गया है, जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जी के लिए ‘डियर सूर्यकांत’ जैसे शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा गया है कि आप इस्तीफा दे दो और यह कहा गया है कि लॉ एंड ऑर्डर आपके बस का नहीं है, तो आप इस्तीफा दे दो। हम नया नियुक्त कर लेंगे। करोड़ों-करोड़ देशवासियों को समझना चाहिए कि लॉ एंड ऑर्डर वैसे भी न्यायालय का विषय नहीं रहता।"
बीजेपी ने आगे कहा -"एक राज्य की ही कांग्रेस पार्टी यह कह रही है कि आप इस्तीफा दे दो, हम नया विकल्प बना लेंगे। अर्थात् अब इनके दिल का जो अनुमान था, वह साफ हो गया है कि इन्हें पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार जी का इस्तीफा चाहिए था, फिर गृह मंत्री अमित शाह जी का इस्तीफा चाहिए था, फिर प्रधानमंत्री मोदी जी का इस्तीफा चाहिए था, अब इन्हें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत जी का इस्तीफा चाहिए। इसका अर्थ साफ हो गया, और वह भी केरल कांग्रेस के द्वारा, जहां इनकी मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन की सरकार है और राहुल जी और प्रियंका गांधी दोनों ही उसका प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।"
बीजेपी ने आगे कहा- "यानी अब बिल्कुल साफ है कि कांग्रेस पूरी तरह से मुस्लिम लीग की माओवादी कांग्रेस होकर, दिमागी नक्सल की किसी भी हद तक जाकर, भारत में अराजकता उत्पन्न करने के लिए हर संवैधानिक संस्था को ध्वस्त करने और भारत की सड़कों पर अराजकता उत्पन्न करने के लिए पूरी तरह से निर्लज्ज और बेशर्म हो चुकी है। मुझे लगता है कि करोड़ों देशवासियों को ध्यान रखना चाहिए कि ये भारत की संवैधानिक संस्थाओं और भारत के संविधान के लिए इस समय कांग्रेस पार्टी और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जी सबसे बड़ा खतरा बन चुके हैं।"
इस घटनाक्रम पर सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने 12 अक्टूबर 2026 को एक आधिकारिक प्रस्ताव पारित किया। SCBA ने CJI के इस्तीफे की मांग करने वाले बयानों की कड़े शब्दों में निंदा की। एसोसिएशन ने स्पष्ट कहा कि हर नागरिक को कानून के दायरे में रहकर अदालत का दरवाजा खटखटाने और न्याय पाने का अधिकार है।
बार एसोसिएशन का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी न्यायपालिका जैसी सर्वोच्च संस्था को नीचा दिखाने और न्याय प्रशासन में अनुचित हस्तक्षेप करने की कोशिश है। SCBA ने सभी सदस्यों से सुप्रीम कोर्ट की गरिमा और मर्यादा बनाए रखने की अपील की है।
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बता दें एक तरफ राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और सुप्रिया सुले समेत 11 प्रमुख विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस याचिका में मुख्य याचिकाकर्ता खुद राहुल गांधी हैं, जो अपने साथी नेताओं के साथ फाइलिंग काउंटर तक पहुंचे थे।
