गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम की याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश के संचालन पर रोक लगा दी है, जिसमें उनकी सैलरी से 5 लाख रुपये की वसूली कर छात्रा आकृति चौधरी को मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट
कोर्ट ने Special Leave Petition दाखिल करने की अनुमति दी और नोटिस जारी किया। सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत के सवाल पर दोनों पक्षों के वरिष्ठ वकीलों को सुनने के बाद कहा कि मामले की मेरिट पर सुनवाई होने तक इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश का संचालन, खास तौर पर पैराग्राफ 27 से 33 तक, स्थगित रहेगा।
7 अक्टूबर को अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले को अगली सुनवाई के लिए 7 अक्टूबर 2026 को सूचीबद्ध किया है। प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है।
दी ये दलीलें
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि जिलाधिकारी के सामने रिपोर्ट सीधे नहीं आई थी, बल्कि SHO, DCP और कमिश्नर समेत कई स्तरों से गुजरने के बाद उनके पास पहुंची थी। उन्होंने यह भी बताया कि NSA एडवाइजरी बोर्ड ने भी हिरासत की जांच की थी।
वहीं, मेधा रूपम की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जिलाधिकारी के सामने NSA आदेश जारी करने से पहले कई वैधानिक चरण पूरे हुए थे। उनके मुताबिक, DM की भूमिका उपलब्ध सामग्री और वैधानिक सुरक्षा उपायों के आधार पर अपनी राय बनाने की थी।
जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस नोंगमीकापम कोटिस्वर सिंह की बेंच ने बुधवार को मेधा रूपम की याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान पीठ ने मौखिक टिप्पणी की कि अगर NSA के तहत हिरासत का फैसला कई अधिकारियों और वैधानिक चरणों से गुजरने वाली प्रक्रिया का हिस्सा था, तो जिलाधिकारी को अकेले जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने कहा, “We can’t isolate her… as fine of Rs 5 lakh.”
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि ये मामला अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए मजदूरों के प्रदर्शन से जुड़ा है। आकृति चौधरी को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था और बाद में उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया गया था। फिर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2 सितंबर को उनकी NSA हिरासत रद्द कर दी थी और कहा था कि हिरासत को जारी रखने के लिए पर्याप्त सामग्री नहीं थी। साथ ही हाई कोर्ट ने ₹5 लाख का मुआवजा देने का निर्देश दिया था, जिसकी वसूली जिलाधिकारी और मामले से जुड़े अन्य अधिकारियों से करने को कहा गया था। हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद मेधा रूपम ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। हाई कोर्ट का फैसला HCWP No. 960/2026 में आया था।सुप्रीम कोर्ट के सामने मेधा रूपम की याचिका में आकृति चौधरी समेत अन्य प्रतिवादी हैं। सुनवाई के दौरान आकृति चौधरी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस पेश हुए और उन्होंने नोटिस स्वीकार किया।
