सुप्रीम कोर्ट में 69 हजार मामले तो संवैधानिक पीठ में 29 केस पेंडिग, एक मामला 31 साल पुराना

  • Authored by: अमित कुमार मंडल
  • Updated Jul 31, 2023, 04:10 PM IST

सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट को संवैधानिक अदालतें कहा जाता है क्योंकि उनके फैसले संविधान की व्याख्या करते हैं और मामलों पर निर्णय करते समय अधीनस्थ न्यायपालिका के लिए संदर्भ बिंदु के रूप में कार्य करते हैं।

Supreme Court: अदालतों पर कितना बोझ है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां लाखों मामले लंबित हैं। सिर्फ सुप्रीम कोर्ट में ही अनगिनत मामले सुनवाई की राह देख रहे हैं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के सामने 69,766 मामले कई वर्षों से लंबित हैं। लेकिन हैरानी की बात है कि इसकी संवैधानिक पीठों के समक्ष भी कई लंबित मामले हैं। पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ के समक्ष सबसे पुराना मामला अब 31 वर्षों से लंबित है। सात-न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष दूसरा मामला 29 वर्षों से फैसले का इंतजार कर रहा है। कुल मिलाकर 29 मामले संवैधानिक पीठों के समक्ष लंबित हैं। नौ-न्यायाधीशों की संविधान पीठ के समक्ष पांच मामले लंबित हैं, जो 1999 के बाद सबसे पुराने हैं। दो अन्य मामले 21 वर्षों से लंबित हैं।

ले संविधान की व्याख्या करते हैं सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट

सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट को संवैधानिक अदालतें कहा जाता है क्योंकि उनके फैसले संविधान की व्याख्या करते हैं और मामलों पर निर्णय करते समय अधीनस्थ न्यायपालिका के लिए संदर्भ बिंदु के रूप में कार्य करते हैं। हालाँकि, उच्च न्यायपालिका में नियमित मामलों की भरमार रहती है जैसे सेवा, जमानत और इसी तरह के अन्य मुद्दे। कानून मंत्रालय के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के समक्ष लंबित 29 मामलों में से 18 मामले पांच-न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष लंबित हैं, जिनमें अनुच्छेद 370 को निरस्त करने की चुनौती भी शामिल है। छह मामले सात-न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष लंबित हैं और पांच मामले नौ-न्यायाधीशों की पीठ के सामने लंबित हैं।

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