Satya Niketan Building Collapse: सत्य निकेतन हादसे से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दिल्ली में कॉलेज और विश्वविद्यालयों के आसपास चल रहे पीजी, निजी हॉस्टल और छात्र आवासों की सुरक्षा को लेकर अदालत अब व्यापक स्तर पर निगरानी करेगी। अदालत में एमिकस क्यूरी की ओर से दाखिल रिपोर्ट पर सुनवाई हुई, जिसमें ऐसे सभी छात्र आवासों की समयबद्ध सुरक्षा जांच कराने की जरूरत बताई गई है। जांच में भवन का स्वीकृत नक्शा, निर्माण, बेसमेंट, जमीन के इस्तेमाल, इमारत की मजबूती, अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन रास्तों जैसे पहलुओं को शामिल करने की बात कही गई है।
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो- PTI)
रिहायशी इलाके में व्यावसायिक इस्तेमाल पर फोकस
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान संकेत दिया कि वह पूरे मामले को टकराव की तरह नहीं देख रहा है। अदालत का फोकस खास तौर पर उन इलाकों में जमीन के इस्तेमाल पर रहेगा, जिन्हें रिहायशी क्षेत्र के तौर पर चिन्हित किया गया है, लेकिन वहां नियमों के खिलाफ व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। कोर्ट ने कहा कि वह ऐसे गैर-अनुरूप उपयोग यानी रिहायशी जमीन के व्यावसायिक इस्तेमाल के मामलों पर ध्यान केंद्रित करेगा और इसकी निगरानी करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- केंद्र की मदद के बिना कामयाब नहीं होंगे
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से भी सहयोग की अपील की। कोर्ट ने कहा कि केंद्र की सहायता के बिना इस मामले में आगे बढ़ना मुश्किल होगा। अदालत ने साफ कहा, “आपकी सहायता के बिना हम विफल हो जाएंगे, हम एक ही तरफ हैं।” कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि हाईकोर्ट में लंबित संबंधित मामले को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित किया जा सकता है।
सत्य निकेतन में इमारत हादसे के बाद दिल्ली में छात्रों के लिए चल रहे पीजी, निजी हॉस्टल और दूसरे आवासों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट में ऐसे सभी परिसरों की समयबद्ध जांच की जरूरत बताई गई है। अब सुप्रीम कोर्ट का जोर सिर्फ एक हादसे की जांच तक सीमित रहने के बजाय रिहायशी इलाकों में नियमों के खिलाफ हो रहे व्यावसायिक इस्तेमाल और उससे जुड़े सुरक्षा जोखिमों पर निगरानी रखने पर दिखाई दे रहा है।
