Satya Niketan building collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत ढहने का गंभीर मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) की चौखट पर पहुंच गया है। गैर-कानूनी निर्माण और डिमोलिशन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त अमिसकस क्यूरी और वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने एक आवेदन दायर कर इस मामले पर आज दोपहर 2 बजे तत्काल सुनवाई की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा सत्य निकेतन मामला (फोटो- PTI)
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PG और हॉस्टलों की जांच की मांग
अदालत के समक्ष दाखिल अपने आवेदन में वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने कहा कि सत्य निकेतन की घटना को केवल एक अकेला हादसा मानकर नहीं देखा जाना चाहिए। इसे दिल्ली के प्रमुख कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के आसपास बड़े पैमाने पर चल रहे पीजी और प्राइवेट हॉस्टलों के संदर्भ में देखना जरूरी है।
आवेदन में यह कहा गया है कि ये संस्थान अक्सर आवासीय संपत्तियों में चलाए जा रहे हैं, जहां स्वीकृत नक्शे में मनमाने बदलाव, निर्माण विस्तार और उपयोग में परिवर्तन किए गए हैं। क्या ये इमारतें बिल्डिंग बाय-लॉज, स्ट्रक्चरल सेफ्टी और फायर-सेफ्टी मानकों का पालन कर रही हैं, इसकी सक्षम अधिकारियों द्वारा तुरंत जांच होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट से 8-सूत्रीय निर्देश देने की अपील
अमिसकस क्यूरी ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है कि वह दिल्ली भर के कॉलेज परिसरों के आसपास चल रहे सभी छात्रों के आवासों और पीजी की एक समयबद्ध जांच और 'सेफ्टी ऑडिट' का आदेश दे। इस ऑडिट में विशेष रूप से 8 मुख्य बिंदुओं की जांच शामिल हो:
- स्वीकृत बिल्डिंग प्लान: निर्माण स्वीकृत नक्शे के अनुसार है या नहीं।
- वास्तविक निर्माण व मंजिलें: स्वीकृत सीमा से अधिक मंजिलों का निर्माण।
- बेसमेंट निर्माण: बेसमेंट में किए गए अवैध बदलाव या निर्माण।
- भूमि उपयोग: तय मानकों के अनुसार स्वीकृत उपयोग।
- ढांचागत सुरक्षा : इमारत की मजबूती और सुरक्षा स्थिति।
- फायर-सेफ्टी अनुपालन: आग से बचाव के पुख्ता इंतजाम और उपकरण।
- आवागमन के रास्ते: आपातकालीन स्थिति में निकलने के रास्ते।
- जर्जर स्थिति: इमारत के किसी भी हिस्से के खतरनाक या जर्जर होने की जांच।
अदालत के समक्ष यह तथ्य रखते हुए अमिसकस क्यूरी ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले पर संज्ञान लेने और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित दिशानिर्देश जारी करने की प्रार्थना की है।
