राहुल गांधी (Rahul Ganhdi) के बाद अब संंजय राउत (Sanjay Raut) की सांसदी खतरे में दिख रही है। चोर मंडली वाले बयान का मामला अब राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के पास पहुंच गया है। अब इस मामले पर राज्यसभा के सभापति क्या फैसला करते हैं, उसी पर राउत की सदस्यता का फैसला टिका है।
जवाब अंसोषजनक
इस महीने की शुरुआत में, महाराष्ट्र परिषद के उपाध्यक्ष नीलम गोरहे ने शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत को भारतीय जनता पार्टी द्वारा उनके खिलाफ दिए गए विशेषाधिकार हनन नोटिस का जवाब देने का निर्देश दिया था। जिसके बाद जब राउत ने जवाब भेजा तो उसे "असंतोषजनक" करार दे दिया गया। गोरहे ने परिषद में बोलते हुए कहा कि राउत ने अपने जवाब में सदन की विशेषाधिकार समिति की संरचना, इसकी निष्पक्षता और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।
क्या कहा उपाध्यक्ष ने
उन्होंने इसके बारे में कहा- "राज्यसभा के एक वरिष्ठ सदस्य होने के नाते, यह उम्मीद नहीं की जाती है कि वह (राउत) विशेषाधिकार समिति के कामकाज के बारे में सवाल उठाते हैं। इसलिए मैं उनकी प्रतिक्रिया से पूरी तरह सहमत नहीं हूं और मुझे यह संतोषजनक नहीं लगता। यह मामला राज्यसभा के सभापति को भेजा गया है क्योंकि राउत राज्यसभा के सदस्य हैं।"
क्या है विवाद
दरअसल जब एकनाथ शिंदे ने शिवसेना को तोड़ा और खुद बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बना लिए तब संजय राउत ने यह बयान दिया था। कोल्हापुर के दौरे पर पहुंचे संजय राउत ने 1 मार्च को कहा था कि यह विधानमंडली नहीं चोर मंडली है। जब विवाद बढ़ा तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने शिंदे गुट के लिए इस शब्द का प्रयोग किया था।
अलोचना के बाद जांच
इस बयान को लेकर संजय राउत के जमकर आलोचना हुई। उनकी टिप्पणी से इस महीने की शुरुआत में महाराष्ट्र विधानसभा की कार्यवाही भी बाधित हुई थी। राउत के खिलाफ एक विशेषाधिकार प्रस्ताव लाया गया था और विधानसभा अध्यक्ष ने विधानसभा के खिलाफ संजय राउत द्वारा दिए गए कथित अपमानजनक बयान की जांच के लिए एक समिति का गठन किया था।
