चंद्रयान-3 की सफलता के पीछे इसरो की इस टीम का दिमाग, कामयाबी के लिए दिन-रात की मेहनत

  • Written by: आलोक कुमार राव
  • Updated Aug 24, 2023, 07:39 AM IST

Chandrayaan-3 Mission : चंद्रयान-3 मिशन की सफलता के लिए इसरो प्रमुख एस सोमनाथ की अगुवाई में वैज्ञानिकों के एक समूह की काबिलियत एवं योग्यता रंग लाई। इस टीम के प्रयासों से ही चंद्रयान-3 मिशन सफल हो पाया है। इस चंद्र मिशन में योगदान देने वाले वैज्ञानिकों की यहां चर्चा करना जरूरी है।

Chandrayaan-3 Mission : चंद्रमा के दक्षिणी हिस्से पर सफलतापूर्वक उतरकर भारत ने बुधवार को इतिहास रच दिया। यह कामयाबी हासिल करने वाला भारत दुनिया का चौथा और साउथ पोल पर उतरने वाला पहला देश बना। भारत की इस कामयाबी पर दुनिया नतमस्तक है और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को बधाई दे रही है लेकिन इस चंद्र मिशन को सफल बनाने के लिए एक नहीं बल्कि इसरो में वैज्ञानिकों की एक टीम ने दिन-रात मेहनत की। चंद्रयान-3 मिशन की सफलता के लिए इसरो प्रमुख एस सोमनाथ की अगुवाई में वैज्ञानिकों के एक समूह की काबिलियत एवं योग्यता रंग लाई। इस टीम के प्रयासों से ही चंद्रयान-3 मिशन सफल हो पाया है। इस चंद्र मिशन में योगदान देने वाले वैज्ञानिकों की यहां चर्चा करना जरूरी है।

isro team

बुधवार को चंद्रयान-3 सफलतापूर्वक चांद पर उतरा।

एस सोमनाथ, इसरो चेयरमैन एवं टीम लीडर

सोमनाथ की अगुवाई में ही पूरे चंद्र मिशन को अंजाम दिया गया है। 14 जनवरी 2022 को सोमनाथ ने इसरो की कमान संभाली और चंद्रयान-3 को चंद्रमा के दक्षिणी हिस्से में उतारने की चुनौती के साथ आगे बढ़े। इसरो से पहले वह विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के प्रमुख थे। साल 2019 में चंद्रयान-2 की क्रैश लैंडिंग होने के बाद उन्होंने 'सॉफ्ट लैंडिंग' की रणनीति में बदलाव किया। उन्होंने कहा कि हमें सफलता प्राप्त करने की जगह अपनी नाकामियों को दूर करने पर ध्यान लगाना चाहिए। उनकी यह रणनीति रंग लाई। चंद्रयान-2 की 'सॉफ्ट लैंडिंग' की खामियों को उन्होंने दूर किया।

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