Rashtriya Swayamsevak Sangh : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के लिए इस वर्ष विजयादशमी खास है। आरएसएस इस साल अपनी स्थापना के 100 साल मना रहा है। 100 साल पहले 1925 में विजयादशमी के दिन ही आरएसएस की स्थापना हुई। नागपुर के रेशम बाग मैदान में सुबह शताब्दी समारोह की शुरुआत होगी। इस समारोह में 21 हजार से ज्यादा स्वयंसेवक शामिल होंगे। यही नहीं, विजयादशमी का यह उत्सव संघ की देशभर की 83 हजार से अधिक शाखाओं में मनाया जाएगा।
आरएसएस अपनी स्थापना का शताब्दी समारोह मना रहा है। फाइल फोटो-पीटीआई
पहली बार भारतीय मुद्रा पर भारत माता की छवि अंकित
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में बुधवार को एक विशेष डाक टिकट और एक स्मारक सिक्का जारी किया, जिसमें पहली बार भारतीय मुद्रा पर भारत माता की छवि अंकित है। सौ रुपये के सिक्के पर एक तरफ राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न है, तो दूसरी तरफ सिंह पर विराजमान भारत माता की छवि जबकि स्वयंसेवक भक्ति और समर्पण के साथ उनके सामने नतमस्तक होते दिख रहे हैं। इस मौके पर मोदी ने कहा, ‘स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार भारतीय मुद्रा पर भारत माता की छवि अंकित की गई है, जो अत्यंत गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण है।’
पीएम मोदी ने डाट टिकट जारी किया
सिक्के पर संघ का मार्गदर्शक आदर्श वाक्य ‘राष्ट्राय स्वाहा, इदं राष्ट्राय, इदं न मम’ भी अंकित है, जिसका अर्थ है ‘सब कुछ राष्ट्र को समर्पित, सब कुछ राष्ट्र का है, कुछ भी मेरा नहीं है।’ डाक टिकट पर 1963 में गणतंत्र दिवस परेड में आरएसएस स्वयंसेवकों की भागीदारी को दर्शाया गया है, जो संगठन के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित करता है। मोदी ने इसे भारत माता और आरएसएस की सेवा और समर्पण की शताब्दी लंबी यात्रा के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण बताया। शताब्दी समारोह का आयोजन संस्कृति मंत्रालय द्वारा किया गया था और इसमें आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय होसबाले, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत शामिल हुए।
1925 में नागपुर में हुई आरएसएस की स्थापना
केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा 1925 में नागपुर में स्थापित आरएसएस की स्थापना एक स्वयंसेवी संगठन के रूप में हुई थी जिसका उद्देश्य नागरिकों में सांस्कृतिक जागरूकता, अनुशासन, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व को बढ़ावा देना था। मोदी स्वयं एक आरएसएस प्रचारक थे और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में आने से पहले एक कुशल संगठनकर्ता के रूप में अपनी पहचान बना चुके थे। भाजपा की वैचारिक प्रेरणा हिंदुत्ववादी संगठन से मिलती है।
पूर्व राष्ट्रपति कोविंद मुख्य अतिथि
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बुधवार को नागपुर पहुंचे और वह यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के विजयादशमी समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। शहर पहुंचने के बाद कोविंद दीक्षाभूमि गए, जहां समाज सुधारक और संविधान के मुख्य वास्तुकार डॉ. बी. आर. अंबेडकर ने 1956 में बौद्ध धर्म अपनाया था। पूर्व राष्ट्रपति ने दीक्षाभूमि पर प्रार्थना की। कोविंद बृहस्पतिवार को यहां आरएसएस की विजयादशमी रैली में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस अवसर पर संघ के शताब्दी वर्ष समारोह का भी आयोजन होगा।
देश भर में एक लाख से ज्यादा ‘हिंदू सम्मेलन’
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में देश भर में एक लाख से ज्यादा ‘हिंदू सम्मेलनों’ समेत कई कार्यक्रमों की योजना बनायी है। इसकी शुरुआत दो अक्टूबर को यहां संगठन के मुख्यालय में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के वार्षिक विजयादशमी संबोधन से होगी। केशव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में विजयादशमी के दिन आरएसएस की स्थापना की थी।
